गड़बड़ी के चलते ही भुगतान रोका गया है
लाइनिंग के नाम पर सरकारी रुपयों की बंदरबाट चौदह करोड़ में पब्लिक को मिली घटिया नहर
अब तक दस नोटिस भेज चुके हैंं
आलोक अग्रवाल, ईई,जल संसाधन विभाग
जल संसाधन विभाग के अफसरों का कहना है कि उन्होंने लाइनिंग काम की क्वाॅलिटी को लेकर ठेकेदार को अब तक 10 नोटिस भेजे हैं, लेकिन वह इसका जवाब तक नहीं दे रहा है। सवाल है कि अधिकारी कॉन्ट्रैक्टर के दबाव में काम कर रहे हैं और नहीं तो ठेकेदार के खिलाफ ब्लैक लिस्टेड या दूसरी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। इस पर भी जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है। इससे ठेकेदार और अफसरों के बीच मिलीभगत का संदेह पैदा हो रहा है।
नहर लाइनिंग के काम में टेंडर के दौरान भी अफसरों ने खुलेआम गड़बड़ी की है। प्रोजेक्ट के मुताबिक काम तीन ठेकेदारों को बांटकर देना था, लेकिन अधिकारियों ने एसआर कंस्ट्रक्शन कंपनी को पूरा काम सौंप दिया। ईई अग्रवाल और एसडीओ एसके सराफ भी मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। दोनों का कहना है कि मामला पहले का है तो दस्तावेजों में देखना होगा कि ठेकेदार के खिलाफ कोई प्रतिद्वंदी था या नहीं। ठेकेदार को 10.9 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है।
बिरकोना में नहर के तटों से सीमेंट की परत उखड़ चुकी है। गड़बड़ी का अंदाजा इसे देखकर लगाया जा सकता है।
सालभर पहले खमतराई में नहर की तस्वीर बयां कर रही है कि जिम्मेदारों ने कितनी संजीदगी से काम किया है।
खारंग जलाशय योजना में नहर की लाइनिंग कार्य की जिम्मेदारी आपकी थी, फिर इसमें गड़बड़ी कैसे हुई?
{हमनेतो अपना काम जिम्मेदारी से किया है, ठेकेदार ने गड़बड़ी की है।
सरकारतो आपको सुपरविजन का वेतन देती है, फिर ठेकेदार ने कैसे गड़बड़ी कर दी?
{हां,इसके कारण तो उसे अब तक 10 नोटिस भेज चुके हैं, पर वह कोई जवाब नहीं दे रहा है।
अबआगे क्या कार्रवाई करेंगे आप?
{कॉन्ट्रैक्टर के खर्च से नहर की मरम्मत करवाएंगे और इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाएगी।
रतनपुर से मोपका तक नहर लाइनिंग काम में गड़बड़ी की शिकायत मिल रही है। लोगों का आरोप है कि अफसर और कॉन्ट्रैक्टर ने मिलकर रुपयों की बंदरबाट की है?
{हां,काम में गड़बड़ी के कारण ठेकेदार का भुगतान रोका गया है। मरम्मत करवाने के लिए उसे नोटिस भी भेजा गया है।
क्याविभागीय अफसरों ने काम की मॉनिटरिंग नहीं की थी?
{ऐसीबात नहीं है। मॉनिटरिंग तो हुई थी बाद में गड़बड़ी सामने आई