भागवत महापुराण ही संसार का सार: विनय
सारंगढ़|श्रीमद भागवतकथा सुन कर जो मनुष्य समझता है और समझकर जो उसे आत्म सात कर लेता है उसकी जिन्दगी मे कभी कष्ट और संकट उसे परेशान नहीं कर सकते हैं। इस महापुराण को देवता भी सुनने को तरसते हैं यह कथा बहुत ही दुर्लभ है हालाँकि अब आज कल प्रत्येक गांव शहर मे श्रीमद भागवत कथा का आयोजन होते रहते हैं लेकिन बावजूद इसके समाज आज सुधारने के बजाय बिगड़ता जा रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि मनुष्य भागवत महापुराण की कथा को केवल सुनता है। उस कथा को सुनने के बाद उसे समझने का प्रयास नहीं करता है अगर इस कथा मे से कोई भी केवल एक लाईन को सुनकर उसे समझे ओर उसको अपने जीवन मे आत्मसात कर ले तो समाज निश्चित रूप से कष्ट और समस्या से आजाद हो जाएगा। उदगार सारंगढ से 5 किमी दूर ग्राम गोडिहारी मे आयोजित श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ मे कथा वाचक पं विनय मिश्रा गुरू भाई ने दिया।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य केवल अपनी बडाई एवं दूसरों की निंदा सुनने मे ही अपना सारा समय लगा देता है। बजाय इसके अगर भागवत कथा के लिए समय निकाले तो उसकी जिंदगी सुख से भर से जाएगी।