कागजों पर नहीं, मौके पर देखेंगे काम
शहरके निर्माण कार्यों की जांच की जाएगी। इसमें नगर निगम के पिछली सरकार के कार्यकाल के पूर्ण बताए जा रहे कामों के अलावा वर्तमान में निर्माणाधीण काम भी हैं। महापौर की मौजूदगी में सोमवार को लोकनिर्माण विभाग के प्रभारी ने कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मौके पर जाकर कामकाज का परीक्षण किया जाएगा। किसी काम में गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम की नई सरकार की निर्माण कार्यों को लेकर यह पहली समीक्षा बैठक थी। विभाग के प्रभारी अजय अग्रवाल ने कामकाज की समीक्षा की। बैठक में महापौर डा. अजय तिर्की, कार्यपालन अभियंता सुनील सिंह के अलावा विभिन्न विभागों के प्रभारी और इंजीनियर मौजूद थे। बजट को ध्यान में रखते हुए अधूरे कामों को पूर्ण करने कहा गया है। ऐसे काम जिसमें फंड को लेकर समस्या है उसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। श्री अग्रवाल ने निर्माण कार्यों की सूची के अवलोकन के बाद कहा कि जो भी काम पूर्ण बताए जा रहे हैं और चल रहे हैं उसकी जांच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि मौके पर कामकाज की क्या स्थिति है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। गड़बड़ी मिली तो इसके जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। िनर्माण कार्यों में पेयजल के पाइप लाइन और बिजली के आड़े आने वाले खंभों के मामले में विभाग के प्रभारियांे से रिपोर्ट मांगी गई। नया बजट घोषणापत्र के अनुरूप होगा।
जमीनके चक्कर में रुके हैं कई काम: शहरमें जमीन नहीं मिलने के कारण कई काम रुके हुए हैं। राशन दुकानों के लिए दो साल से जमीन की तलाश चल रही है लेकिन अब भी सात वार्डों में दुकान के लिए जमीन नहीं मिली है। नगर निगम कार्यालय के लिए अब तक जमीन नहीं उपलब्ध हो पाई है। मुख्यमंत्री ने दो साल पहले कार्यालय के लिए शिलान्यास किया था। सार्वजनिक शौचालय का काम भी जमीन के चक्कर में रुका हुआ है। अलग-अलग क्षेत्रों में 11 सार्वजनिक शौचालय बनने हैं। सांस्कृतिक भवन के लिए जमीन की तलाश चल रही है। पिछले कार्यकाल में इसके लिए पहल शुरू हुई थी। विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता टीएस सिंहदेव ने सांस्कृतिक भवन के लिए 25 लाख रुपए देने की घोषणा की है। लोक निर्माण विभाग के प्रभारी ने कहा कि शहर में विकास कार्यों के लिए जमीन को लेकर परेशानी है। इस पर ध्यान देकर जमीन उपलब्ध करानी होगी।
अधिकारियों की बैठक लेते मेयर डॉ. अजय तिर्की
कई कामों में फंड की अड़चन
शहरमें करोड़ों के काम अधूरे पड़े हैं तो कई काम शुरू नहीं हो पाए हैं। नगर सुराज अभियान के तहत पांच करोड़ की स्वीकृति मिली थी जिसमें ढाई करोड़ रूपए मिले थे। इसे पूरा करने के बाद दूसरी किश्त जारी होनी थी लेकिन अब तक काम पूरे नहीं हुए। तेरहवें वित्त के तहत 13 करोड़ में से 11 करोड़ मिल चुके हैं। कई काम ऐसे हैं जिसके लिए एलाटमेंट जारी नहीं है तो कई काम ऐसे हैं जिसके लिए एलाटमें है लेकिन निविदा नहीं खुली है। ऐसे कामों में तेजी लाने को कहा गया है। मुख्यमंत्री के घोषणा वाले काम भी अधूरे हैं। करीब सात करोड़ की लागत से ये काम होने हैं। इनमें गांधी स्टेडिम में फाल सीलिंग का काम भी है। सियान सदन, चौक चौराहों का सौंदर्यीकरण का अधूरा है। अल्पसंख्यक समुदाय की बालिकाओं के लिए छात्रावास के लिए अब तक राशि जारी नहीं हुई। दस करोड़ की लागत से बिशुनपुर क्षेत्र में छात्रावास बनना है। सांसद, विधायक मद के भी कई काम अधूरे हैं।