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सीटी स्कैन बेकार, मरीज हलाकान

6 वर्ष पहले
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जिलाअस्पताल में सीटी स्कैन मशीन खराब होने से मरीजों की फजीहत हो गई है। वैकल्पिक व्यवस्था बनाने प्रबंधन द्वारा कुछ दिनों के लिए प्राइवेट संस्थानों से एग्रीमेंट कर जांच की सुविधा शुरू की गई लेकिन यह भी कारगर साबित नहीं हो पाई। महीने में पांच मरीजों का ही कोटा निर्धारित होने से समस्या उत्पन्न हो रही है। आउट सोर्सिंग से स्थायी व्यवस्था के लिए अभी तक किसी संस्था से एग्रीमेंट ही नहीं हो पाया। इससे मरीज परेशान हैं। मरीजों को इमरजेंसी में अब ज्यादा फीस देकर प्राइवेट में जांच करानी पड़ रही है। इधर शासन ने भी फिलहाल नई मशीन देने से मना कर दिया है। इससे समस्या के स्थायी समाधान की फिलहाल कोई उम्मीद नजर नहीं रही है।

जिला अस्पताल में मरीजों के लिए सीटी स्कैन जांच की सुविधा एक दशक से पहले शुरू हुई थी। मशीन ने भी साथ दिया। पिछले दिनों मशीन का पिक्चर ट्यूब खराब हो गया। प्रशासन द्वारा पहल कर नई पिक्चर ट्यूब लगवाई गई। मशीन सिमेंस कंपनी की है। पिक्चर ट्यूब लगाने में करीब 30 लाख रुपए की लागत आई थी। इसकी गारंटी थी लेकिन नई पिक्चर ट्यूब ने साथ नहीं दिया। कुछ महीने में ही पिक्चर ट्यूब खराब हो गई। इस उम्मीद में कि शासन से एक-दो महीने में नई मशीन या फिर पिक्चर ट्यूब मिल जाएगा, अस्पताल प्रबंधन ने जिला प्रशासन के निर्देश पर अस्थायी व्यवस्था के तौर पर शहर में उपलब्ध कुछ प्राइवेट संस्थानों से अस्पताल की दर पर ही सीटी स्कैन कराने के लिए एग्रीमेंट कर लिया। कोई गड़बड़ी हो इसलिए एक संस्थान में महीने में पांच मरीजों का कोटा निर्धारित कर दिया गया। इसी बीच शासन ने भी नई मशीन या फिर पिक्चर ट्यूब के लिए राशि उपलब्ध कराने से मना कर दिया। ऐसे में स्थायी व्यवस्था के लिए आउट सोर्सिंग से सीटी स्कैन जांच की सुविधा शुरू करने पहल की गई। नई व्यवस्था में किसी एक संस्था को अस्पताल के मरीजों का सीटी स्कैन कराने की जिम्मेदारी देने का विकल्प रखा गया। इसके लिए पिछले दिनों सभी संस्थानों से अस्पताल प्रबंधन ने चर्चा भी की और उनसे दर भी मंगाए गए, लेकिन अभी तक किसी एक संस्था से इसके लिए एग्रीमेंट नहीं हो पाया है। इससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जल्द शुरू होगी स्थायी व्यवस्था

^आउटसोर्सिंग से प्राइवेट संस्थानों से सीटी स्कैन कराने की व्यवस्था की गई है। इसमें एक संस्था में महीने में अधिकतम पांच मरीजों का कोटा निर्धारित किया गया है। इससे कोटा पूरा होने के बाद संबंधित संस्था में अस्पताल के मरीज को लाभ नहीं मिलता है। इसलिए आउट सोर्सिंग से स्थायी व्यवस्था की तैयारी चल रही है। टेंडर हो गया है। चुनाव के कारण आगे की कार्रवाई नहीं हो पाई। कलेक्टर से अप्रूवल मिलने के बाद संबंधित संस्था को जांच की जिम्मेदारी दे दी जाएगी। इसके बाद दिक्कत दूर हो जाएगी। डा.एनके पांडेय, सीएस सह मेडिकल सुपरिटेडेंट

इसलिए हो रही दिक्कत

नईव्यवस्था शुरू नहीं होने से फिलहाल पुराने एग्रीमेंट पर कुछ संस्थानों में जरूरत पड़ने पर मरीजों को सीटी स्कैन के लिए भेजा जा रहा है। एक संस्था में महीने में पांच का कोटा जैसे ही पूरा होता है, वैसे ही अस्पताल के दर पर जांच की सुविधा देने से संस्था द्वारा मना कर दिया जाता है। ऐसे में मरीज को बाजार के दर पर जांच करानी पड़ती है। जिला अस्पताल में औसत प्रतिदिन चार से पांच सीटी स्कैन होते थे। अभी लगभग यही औसत हैं। ऐसे में कोटा महीने के शुरू में ही पूरा हो जाता है। इससे बाद में आने वाले मरीजों को दिक्कतों को सामना करना पड़ता है। कोटा पूरा होने के बाद अस्पताल से पर्ची भी नहीं काटी जा रही है।

जीवन दीप समिति को नुकसान

जिलाअस्पताल में सीटी स्कैन की जांच बंद होने से अस्पताल के जीवन दीप समिति को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। समिति की आय में सीटी स्कैन का काफी योगदान था। प्रति महीने एक लाख रुपए से ज्यादा की आमदनी हो जाती थी। मशीन खराब होने से आय का यह स्रोत अब बंद हो गया है। गौरतलब है कि अस्पताल में कई व्यवस्थाएं जीवन दीप समिति के मद से संचालित होती है। बताया जा रहा है कि सीटी स्कैन के बंद होने से अस्पताल की कई और व्यवस्थाएं फंड की कमी के कारण प्रभावित हो जाएगीं।