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अधिक फसल उत्पादन के लिए किसान करें वैज्ञानिक खेती
कृषि विज्ञान केंद्र अजिरमा में अभा समन्वित मृदा परीक्षण फसल अनुक्रिया सहसंबंध परियोजना विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण एवं संगोष्ठी आयोजित
भास्करन्यूज | अंबिकापुर
इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र अजिरमा में आलू अनुसंधान केन्द्र मैनपाट एवं आदिवासी उपयोजना के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय समन्वित मृदा परीक्षण फसल अनुक्रिया सहसंबंध परियोजना विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रषिक्षण एवं संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर एवं कोरिया जिले के 350 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद कमलभान सिंह ने इस मौके पर कहा कि वर्तमान परिवेश में अधिक फसल उत्पादन प्राप्त करने की दृष्टि से वैज्ञानिक ढंग से खेती करना अनिवार्य है। इसके लिए यदि किसान भाई मिट्टी की जांच कराएं तो फसल उत्पादकता में और बढ़ोतरी हो सकती है।
सांसद श्री सिंह ने जिले में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला एवं चलित मृदा प्रयोगशाला दिलाने का आश्वासन दिया ताकि अधिक से अधिक कृषक इसका लाभ ले सकें। उन्होंने चारों जिले के मृदा परीक्षण का प्रशिक्षण लेने वाले किसानों को मृदा परीक्षण किट प्रदान किया। केन्द्र के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरके मिश्रा ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र तकनीक के जरिए कृषकों को विभिन्न फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीक के बारे में प्रशिक्षित करता है। कृषकों को कृषि के अलावा डेयरी, मुर्गी, मछली पालन, केंचुआ खाद उत्पादन, मशरूम एवं मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण के साथ तकनीकी जानकारी भी दी जाती है। उन्होंने बताया कि जिले के करीब 100 किसानों की खेत पर गेहूं फसल में प्रदर्शन आयोजित कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। कार्यक्रम में डॉ. पीके जोशी प्रमुख वैज्ञानिक अखिल भारतीय आलू अनुसंधान परियोजना, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने आलू फसल में कृषकों की विभिन्न समस्याओं का समाधान किया एवं आलू उत्पादन हेतु इस क्षेत्र के लिए उपयोगी प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आलू उत्पादन में अगेती एवं पिछेती झुलसा उकठा रोग के प्रभावी नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक उपाय बताए।
डॉ. व्हीएन मिश्रा प्रमुख वैज्ञानिक, मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग परियोजना ने कृषकों को मृदा परीक्षण का महत्व एवं मृदा परीक्षण के आधार पर उचित संतुलित उर्वरक प्रयोग पर जानकारी दी। भारतीय मृदा अनुसंधान संस्थान भोपाल के परियोजना समन्वयक डॉ. प्रदीप डे ने गेहूं फसल में मृदा परीक्षण आधारित प्रदर्शन का अवलोकन कर कृषकों को मृदा परीक्षण एवं संतुलित उर्वरक प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सांसद से जिले में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला एवं चलित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला उपलब्ध कराने का आग्रह किया। एबी आसना संयुक्त संचालक कृषि ने कृषकों को मृदा परीक्षण हेतु प्रोत्साहित किया तथा मृदा स्वास्थ कार्ड बनाने शासन की योजना के बारे में जानकारी दी। डॉ. व्हीके सिंह प्रमुख वैज्ञानिक राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय ने उन्नत तकनीक एवं उर्वरक प्रबंधन पर कृषकों को जानकारी दी। डॉ. जेपी हरिनखेरे अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय ने आलू एवं सब्जी फसलों में समन्वित कीट नियंत्रण के बारे में बताया। डॉ. एके पालीवाल ने फसल में सूक्ष्म पोषक तत्वों की महत्ता की जानकारी दी। कार्यक्रम में सचिन कुमार सस्य वैज्ञानिक द्वारा विभिन्न फसलों मे समन्वित निंदा नियंत्रण विषय पर कृषकों को जानकारी दी गई। डॉ. एसआर दुबोलिया वैज्ञानिक ने कृषि तकनीकी हस्तान्तरण में कृषि प्रसार विधियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ. एके सिन्हा, डॉ. डीके गुप्ता, श्रीमती शिखा मरकाम, श्रीमती रजनी अगासे, राजेश चौकसे, प्रदीप सिंह, अनिल सोनपाकर, धर्मपाल केरकेट्टा, टीआर साहू एवं डॉ. पीके चौरसिया उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने मे कृषि विभाग के अधिकारी विनय बंसल का सहयोग रहा।
कृषक प्रशिक्षण सह संगोष्ठी को संबोधित करते कृषि वैज्ञानिक