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बरवाडीह लाइन के लिए रेलवे के पास िसर्फ एक हजार रूपए
फंड के चक्कर में दो साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया काम, रेल बजट में फिर उम्मीद
भास्करन्यूज | अंबिकापुर
बरवाडीहरेल लाइन के लिए प्रतीकात्मक रूप से एक हजार का बजट स्वीकृत है। दो साल पहले यूपीए सरकार के कार्यकाल में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति मिली थी। फंड के चक्कर में विस्तार का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। 26 फरवरी को पेश होने वाले रेल बजट में फंड स्वीकृत होने की उम्मीद है। 182 किलोमीटर इस रेल लाइन के विस्तार से आदिवासी बहुल यह अंचल मुंबई हावड़ा से जुड़ जाएगा। 1935-36 में यह परियोजना अंग्रेजों ने शुरू की थी।
रेलवे के सीपीआरओ आरके अग्रवाल ने गुरुवार को अनूपपुर-अंबिकापुर मेमू ट्रेन के यहां शुभारंभ अवसर पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परियोजना की स्वीकृति के बाद प्रतीकात्मक रूप से एक हजार रूपए रेलवे के बजट में डाल दिया गया है। इससे परियोजना के विस्तार की उम्मीद बंध गई है। रेलवे की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण अब तक फंड स्वीकृत नहीं हो पाया। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ऊपर स्तर पर पहल हुई तो इस बार के बजट में स्वीकृित मिल सकती है। इसके लिए छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड सरकार से समन्वय बनाने की कोशिश की जा रही है जहां इस लाइन का विस्तार होना है। दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है जिससे आशा की किरण दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनाव में अंबिकापुर-बरवाडीह रेल लाइन मुख्य मुद्दा था। केंद्र की सत्ता में आने के बाद भाजपा ने इस परियोजना के विस्तार की बात कही है। मोदी सरकार का यह पहला पूर्ण बजट है। सत्ता में आने के बाद अंतरिम बजट पेश किया गया था।
लंबेसंघर्ष और इंतजार के बाद मिली स्वीकृति: जबलपुर,कटनी, अनूपपुर, चिरमिरी रेल लाइन को रांची बड़काकाना, बरवाडीह से जोड़कर मुंबई कोलकाता के बीच की दूरी अन्य रेल मार्गों की अपेक्षा चार सौ किलोमीटर कम करने के उद्देश्य से अंग्रेजों ने यह महत्वाकांक्षी रुपरेखा तैयार की थी। स्वीकृति के बाद काम शुरू हो गया था और बरवाडीह से बलरामपुर जिले के सरना तक अर्थ वर्क के अलावा कई जगहों पर पुल-पुलियों के काम भी कराए गए थे। अंग्रेजों के चले जाने के बाद यह काम रुक गया। बलरामपुर के चनान और कन्हर नदी पर इसके लिए बनाए गए पुल आज भी हैं। 2006 में अंबिकापुर तक रेल लाइन आने के बाद बरवाडीह की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ा और 2104 में इसकी मंजूरी मिली।
प्रस्तावितस्टेशन: बरवाडीहरेल मार्ग के लिए हुए नए सर्वेक्षण में अंबिकापुर से बरवाडीह के बीच एक दर्जन से अधिक स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें अंबिकापुर से आगे परसा, बरियों, राजपुर रोड, कर्रा, पस्ता, झलरिया, दलधोवा, सरनाडीह जबकि झारखंड के बरगढ़, नौकी, बिंदा, पारो, हुतार बरवाडीह हैं। रेल सेवा से अंबिकापुर, बैकुंठपुर, मनेंद्रगढ़, बलरामपुर, रामानुजगंज के अलावा झारखंड के डाल्टेनगंज, बड़काकाना, गढ़वा, रांची, बोकारो जैसे नगरों की वर्तमान स्थिति में एक बड़ा परिवर्तन दिखने लगेगा।
8 अन्य परियोजनाओं के लिए सर्वे
बरवाडहीलाइन के मंजूरी के साथ ही इस अंचल के लिए कई अन्य लाइनों के सर्वे के लिए भी स्वीकृति मिली थी। इनमें कुछ का सर्वे चल रहा है जबकि कुछ प्रोसेस में है। इनमें अंबिकापुर गढ़वा लाइन के लिए सर्वे भी है लेकिन बरवाडीह तक लाइन चुकी स्वीकृत है इसलिए इसके लिए अलग से लाइन नहीं जाएगी। रामानुजगंज से बरवाडीह लाइन को ही गढ़वा से जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा अंबिकापुर झारसुगड़ा, नागरपुर-पाराडोल, चोपन, रेणूकुट लाइन है।