स्कूल के शौचालय का सैप्टिक टैंक ढहा
पचास हजार की लागत से बना है शौचालय
भास्करन्यूज | अंबिकापुर
शहरके नवापारा स्थित प्राइमरी स्कूल में विकलांग बच्चों के लिए बनाए गए शौचालय में सैप्टिक टैंक के स्लैब की ढलाई लोहे की छड़ के बजाय बेशरम झाड़ के डंडे बिछाकर कर दी गई। इसका खुलासा गुरुवार को उस समय हुआ जब स्लैब ढह गई। इससे वहां रहे बच्चे बाल-बाल बच गए। इसका निर्माण 50 हजार की लागत से नगर निगम के माध्यम से कराया गया है। शौचालय अभी स्कूल को हैंडओवर नहीं हुआ है लेकिन टैंक ढहने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ गया है।
स्कूलों में हजारों रुपए खर्च कर बच्चों के लिए शौचालय बनाए जा रहे हैं लेकिन निर्माण एजंेसियां यहां भी गड़बड़ी करने से बाज नहीं रही हैं। ज्यादा मुनाफे के चक्कर में छोटे बच्चों के स्कूलों में भी सुरक्षा के मापदंड का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। नवापारा प्राइमरी स्कूल में सुबह शौचालय के टैंक ढहने की घटना से कुछ ऐसी ही बातें सामने रही है। शासन द्वारा स्कूलों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने योजना चलाई जा रही है। योजना के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि विकलांग बच्चों के लिए स्कूल में अलग से शौचालय बनाए जा रहे हैं। इसके लिए पचास हजार रुपए का बजट आवंटित है। बजट सर्व शिक्षा अभियान से संबंधित एजेंसियों को आवंटित कर दिया गया है। इसी के तहत नवापारा प्राइमरी स्कूल में विकलांग बच्चों के लिए सर्वशिक्षा अभियान द्वारा नगर निगम को शौचालय बनाने पचास हजार रुपए का बजट दिया गया था। स्कूल में सामान्य बच्चों के लिए पहले से ही एक शौचालय है।
निगम द्वारा विकलांग बच्चों के शौचालय का निर्माण ठेके पर कराया गया। निर्माण एजेंसी ने गर्मी के सीजन में काम किया। स्कूल के किचन के पास खाली जमीन में शौचालय बना है। पास में ही शौचालय का सेप्टिक टैंक बनाया गया लेकिन इसकी ढलाई में छड़ की जगह बेशरम के झाड़ के डंडे लगा दिए गए। हालांकि अभी स्कूल को शौचालय हैंडओवर नहीं हुआ है। इसी बीच गुरुवार को सेप्टिक टैंक का स्लैब भरभरा कर गिर गई। बताया जा रहा है उस समय कुछ बच्चे वहीं पर थे जो बाल-बाल बच गए। यह देखकर स्कूल के शिक्षकों ने ईंट लगाकर टैंक को घेर दिया ताकि उधर कोई छात्र जा सके। शिक्षकों ने इसकी सूचना नगर िनगम एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दे दी है। इधर घटना से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। शहर में जब निर्माण की यह स्थिति है तो जिले के दूरस्थ क्षेत्रों मेें बन रहे शौचालय एवं निर्माणों की क्या स्थिति होती होगी इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
अधिकारी नहीं जाते साइट पर!
ठेकेपर होने वाले कामों का विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है, ताकि निर्माण में कोई गड़बड़ी हो लेकिन नवापारा की घटना से अधिकारियों के साइट निरीक्षण पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि यहां सर्वशिक्षा अभियान या फिर निगम के इंजीनियर एवं अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया होता तो शायद ऐसी स्थिति निर्मित नहीं होती। जानकारों के अनुसार जितना बड़ा टैंक है उसमें मुश्किल से 10 से 15 किलोग्राम छड़ लगते लेकिन ठेकेदार ने इसे बचाने छड़ की जगह लकड़ी डाल दी जिसके कारण टैंक गिर गया।
निगम को दिया गया था बजट
^स्कूलमें विकलांग बच्चों के लिए शौचालय बनाने सर्वशिक्षा अभियान से नगर निगम को 50 हजार रुपए का आवंटन दिया गया है। निर्माण निगम द्वारा ही कराया गया है। सूचना पर मौके का निरीक्षण किया। सेप्टिक टैंक की ढलाई में छड़ नहीं लगाया है जिससे हादसा हुआ। इस संबंध में नगर निगम से जानकारी ली जाएगी। राजीवगुप्ता, एई सर्वशिक्षा अभियान
सैप्टिक टैंक यूजलेस था
^मैअभी बाहर हूं। वैसे सूचना पर संबंधित अधिकारी जांच में गए थे। जो टैंक गिरा है वह यूजलेस है। उसमें कनेक्टिंग पाइप अन्य चीजें नहीं लगी हैं। पास में ही दूसरा सेप्टिक टैंक बना है। मामले की जांच कराई जाएगी। यदि टैंक यूजलेस था तो उसे ढक देना था। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सुनीलसिंह, कार्यपालन यंत्री नगर निगम