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भालू के हमले से बचने जंगल में भागे तो हाथियों की चपेट में आए, पति की मौत
मृतक की प|ी किसी तरह बचा पाई जान, क्षेत्र में 18 हाथियों का दल है मौजूद
अंबिकापुर | भटगांव/प्रतापपुर
जजावल गांव स्थित अपनी बेटी की ससुराल से लौट रहे दंपती पर खरसोता के जंगल में एक भालू ने हमला कर दिया। उससे बचने दोनों शोर मचाते हुए जंगल के भीतर भागे। प|ी तो किसी तरह जंगल से सड़क की ओर सुरक्षित निकल गई लेकिन उसका पति जंगल के भीतर भटक गया। इसी बीच वहां मौजूद हाथियों के दल ने उसे घेर लिया और कुचलकर मार डाला। घटना मंगलवार देर शाम को हुई। हाथियों की दहशत के चलते ग्रामीण व वन विभाग के कर्मचारी मौके पर नहीं गए। बुधवार दोपहर में काफी तलाश के बाद मृतक की लाश जंगल के भीतर से बरामद की गई।
चंदौरा थानांतर्गत ग्राम परमेश्वरपुर निवासी 42 वर्षीय दुलराज गोंड़ पिता सोहन राम अपनी प|ी के साथ बेटी की ससुराल जजावल गांव गया था। वहां से दोनों मंगलवार शाम करीब पांच बजे पैदल जंगल के रास्ते परमेश्वरपुर की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान जंगल में एक भालू ने दोनों पर हमला कर दिया। उससे बचने पति-प|ी जोर-जोर से आवाज लगाते हुए इधर-उधर भागे। भागने के दौरान ही दुलराज जंगल के ज्यादा भीतर चला गया वहीं उसकी प|ी किसी तरह जंगल से सुरक्षित निकलकर गांव की ओर पहुंच गई। उधर दुलराज रात होने के कारण जंगल में रास्ता नहीं ढूंढ पा रहा था। उसे यह भी नहीं पता था कि जिस जगह पर वह है उसके आसपास 18 हाथियों का दल मौजूद है। अचानक हाथियों ने उसे चारों ओर से घेर लिया। इससे पहले कि वह भाग पाता हाथियों ने उसे पैरों से कुचल दिया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उधर दुलराज की प|ी ने रात में जाकर इसकी जानकारी परिजनों को दी।
दस हजार की मिली तत्कालिक सहायता राशि
वन विभाग को घटना के बारे में ग्रामीणों ने सूचना दी लेकिन रात होने व हाथियों के खौफ के चलते कोई जंगल की ओर नहीं गया। ग्रामीण का शव रात भर जंगल में ही पड़ा रहा। सुबह होते ही मृतक की लाश की खोजबीन की गई। काफी देर बाद उसका शव जंगल के भीतर मिला। घटनास्थल पर फारेस्ट एसडीओ, रेंजर अनिल सिंह सहित वन व पुलिस के अधिकारी जांच करने पहंुचे थे। मृतक की प|ी को विभाग की ओर से दस हजार रुपए की तात्कालिक सहायता राशि दी गई है।
कॉरीडोर प्रस्ताव को अब तक मंजूरी नहीं
हाथियों की मौजूदगी की नहीं थी जानकारी
खरसोता जंगल में तीन किमी दूर मिला शव
प्रतापपुर इलाका हाथियों से सबसे ज्यादा प्रभावित है। इस इलाके में हाथियों के लिए कॉरीडोर प्रस्तावित है। बताया गया कि सेमरसोत एवं तमोर पिंगला से लगे जंगल जहां हाथियों का सालभर मूवमेंट बना रहता है, उस इलाके को हाथी कॉरीडोर बनाने का प्रस्ताव वन विभाग द्वारा शासन को भेजा गया है। अब तक प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। उनके लिए कॉरीडोर में भोजन-पानी की सुविधा भी रहेगी, ताकि वे बस्ती की ओर न पहंुचें। हाथियों के हमले के कारण वन विभाग को भी हर साल लाखों का मुआवजा बांटना पड़ता है। तीन साल में अकेले प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में डेढ़ करोड़ की मुआवजा राशि बांटी गई है।
दुलराज और उसकी प|ी जजावल से शार्टकट रास्ते से जल्द परमेश्वरपुर लौटना चाहते थे, इसलिए वे जंगल के रास्ते से लौट रहे थे। दोनों को इस बात की भनक नहीं थी कि जंगल के भीतर हाथियों का दल घूम रहा है। घटना की शाम ही चंदौरा इलाके से वन विभाग के हाथी मित्र दल ने खरसोता क्षेत्र में जाकर ग्रामीणों को जंगल के भीतर नहीं जाने की समझाइश दी थी, लेकिन दुलराज और उसकी प|ी को इसके बारे में जानकारी नहीं थी। भालू ने जब उन पर हमला किया तो वह बदहवासी व अंधेरा होने के कारण दुलराज जंगल में भटक गया और हाथियों की चपेट में आ गया।
परमेश्वरपुर पंचायत से ही खरसोता का जंगल शुरू हो जाता है। यह जंगल काफी बड़े इलाके में फैला है। जजावल का रास्ता सड़क के अलावा जंगल के भीतर से भी है। बुधवार दोपहर वन विभाग की टीम एवं चंदौरा पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से मृतक की तलाश शुरू की। उसकी प|ी के बताए रास्ते में काफी तलाश की गई। इस दौरान जंगल में करीब तीन किमी भीतर उसकी लाश अौंधे मुंह मिली। शव को काफी मशक्कत के बाद जंगल से बाहर लाया गया। पंचनामा के बाद शव को पीएम के लिए प्रतापपुर अस्पताल भेजा गया।
प्रतापपुर वनप्रक्षेत्र जजावल गांव में हुए हादसे के बाद मृतक का शव तलाशते ग्रामीण व वन विभाग के अधिकारी- कर्मचारी।