दीपांशु ने रचा इतिहास, ताइक्वांडो में प्रदेश को दिलाया पहला गोल्ड
भास्कर संवाददाता | अंबिकापुर
घुमंतु एवं कामगार बच्चों के लिए संचालित सौ सीटर आवासीय स्कूल केदारपुर के सातवीं कक्षा के छात्र दीपांशु लकड़ा ने ताइक्वांडो में पहली बार छत्तीसगढ़ को स्कूलों की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक दिलाकर नया रिकार्ड बनाया है। अभावों के बीच नेशनल गेम्स तक पहंुचे दीपांशु ने अपनी खेल प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया है।
3 से 7 फरवरी तक महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित 61 वीं नेशनल स्कूल ताइक्वांडो टूर्नामेंट में दीपांशु ने अंडर 14 के 21-23 किलोग्राम कैटेगरी में स्वर्ण पदक हासिल किया। ताइक्वांडो में छत्तीसगढ़ को पहली बार किसी खिलाड़ी ने नेशनल गेम्स में गोल्ड मैडल दिलाया है। शहर से लगे मानिकप्रकाशपुर इलाके में दीपांशु का परिवार रहता है। अत्यंत कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण मां इन बच्चों की परवरिश करने में दिक्कत महसूस कर रही थी। कलेक्टर की पहल से दीपांशु और उसके छोटा भाई हिमांशु को सौ सीटर आवासीय विद्यालय में दाखिला मिला था। शेष पेज |13
उसकी बड़ी बहन कन्या परिसर में पढ़ती है। आवासीय विद्यालय में शुरू से ही दीपांशु को ताइक्वांडो खेल का माहौल मिला। अधीक्षक सुरेंद्र कुमार सिंह खुद ऐसे बच्चों की खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने लगातार प्रोत्साहित करते रहे। जल्द ही वह इस खेल को गंभीरता से लेने लगा।
बाद में मनीष राजन मुदलियार एवं अभिषेक पांडेय ने यहां के बच्चों को ताइक्वांडो की ट्रेनिंग देनी शुरू की। ताइक्वांडो खेल के लिए जरूरी किट नहीं होने के बावजूद दीपांशु ने कई टूर्नामेंट में अपना टैलेंट दिखाया। पिछले साल उसने जबलपुर में आयोजित नेशनल स्कूल ताइक्वांडो टूर्नामंेट में कांस्य पदक हासिल किया था। इसके बाद उसने और कड़ी मेहनत की और इसी का नतीजा रहा कि वह गोल्ड मैडल हासिल करने में कामयाब हुआ।
पुणे में आयोजित टूर्नामेंट में गोल्ड मैडल जीतने के बाद दीपांशु (बाएं से तीसरा)।
इससे पहले भी दीपांशु बड़े टूर्नामेंटों में शामिल होता रहा है लेकिन कुछ कमियाें के चलते वह टॉप पोजिशन नहीं हासिल कर पाया। पिछले साल जबलपुर में नेशनल गेम्स में कांस्य पदक हासिल करने के बाद से ही उसने आगे के लिए कड़ी मेहनत शुरू कर दी। दीपांशु ने भास्कर से चर्चा के दौरान बताया कि इस बार के टूर्नामेंट को वह हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। उसने अपना हौसला पूरी प्रतियोगिता के दौरान नहीं खोया। जीत से पहले उसे दो काफी संघर्षपूर्ण मुकाबले खेलने पड़े। सेमीफाइनल में इस खेल के माहिर मणिपुर राज्य के खिलाड़ी से उसका सामना हुआ। इसमें दीपांशु ने शानदार खेल का प्रदर्शन कर फाइनल में जगह बनाई। यहां उसका मुकाबला दिल्ली के खिलाड़ी से था। दीपांशु ने बताया कि वह फाइनल में अाखिरी राउंड से पहले तक पिछड़ रहा था लेकिन मैच खत्म होने से पहले उसने अपने प्रतिद्वंदी को किक मारकर जमीन पर गिरा दिया। इसी के आधार पर निर्णायकों ने उसे विजेता घोषित किया।
दीपांशु की सफलता ने प्रदेश का नाम बढ़ाया
कलेक्टर ऋतु सैन ने मंगलवार को टीएल की बैठक में दीपांशु को मैडल देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस बच्चे की सफलता सरगुजा ही नहीं प्रदेश के लिए गौरव की बात है। यह बालक अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने सभी आवासीय विद्यालय के छात्राें को विशेष प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देने की व्यवस्था करने कहा। कलेक्टर ने शहर के ताइक्वांडो खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने सर्वसुविधायुक्त हॉल बनाए जाने के निर्देश दिए।
फाइनल मुकाबले में हौसले ने दिलाई जीत
सर्वशिक्षा अभियान की ओर से मिला सम्मान
गोल्ड मैडल जीतकर स्कूल पहुंचने पर दीपांशु का मंगलवार को सर्वशिक्षा अभियान की ओर से सम्मान समारोह आवासीय विद्यालय में किया गया। इसमें डीईओ आरपी आदित्य ने कहा कि प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। दीपांशु ने कठिन परिस्थितियों में रहकर राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर यह कर दिखाया है। उन्हांेने छात्रावास के शिक्षकों एवं कोच को भी सफलता के लिए बधाई दी। जिला मिशन समन्वयक आशीष दुबे ने कहा कि दीपांशु की यह जीत एक कीर्तमान है। एपीसी रविशंकर तिवारी ने कहा कि निर्धन परिवार के इस बालक ने अपनी प्रतिभा के दम पर यह उपलब्धि हासिल की है। कार्यक्रम में दीपांशु लकड़ा को स्मृति चिन्ह एवं शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर अधीक्षक सुरेंद्र कुमार सिंह सहित आदि उपस्थित थे।