सेनेटरी पार्क: आज से लगाए जाएंगे पौधे
बिलासपुर रोड में कचरा डंपिंग स्थल पर बनना है पार्क, जमीन को कर लिया गया समतल
कवायद
जमीन को मूल स्वरुप में लाने में हो गए लाखाें खर्च
भास्कर संवाददाता|अंबिकापुर
बिलासपुर रोड में शहर के प्रवेश द्वार के पास ये कचरा डंपिंग स्थल है। तीस सालों से भी अधिक समय से नगर निगम द्वारा कचरा डंपिंग किया जा रहा था। अब यहां सेनेटरी पार्क की कवायद चल रही है। कचरे को खत्म कर जमीन को मूल स्वरूप में लाने में लाखों रूपए खर्च हो रहे हैं। रविवार से यहां हरियाली के लिए काम शुरू होगा। कचरे को ही चारों तरफ से मेड़ बनाया गया है। जूट के बोरे और बैक्टीरिया के माध्यम से हरा भरा किया जाएगा।
शहर के प्रवेश द्वार से लगा हुआ यह स्थल है। बिलासपुर की ओर से आते ही सामने कचरा दिखाई देता था। इससे लेकर काफी बदनामी होती थी। इसे दूर करने का काम शुरू हुआ और दो महीने में ही स्थल को देखकर नहीं लगता कि कचरा डंपिंग स्थल है।
8 एकड़ में फैले इस क्षेत्र में कचरे का पहाड़ लग गया था। सालों से यहां कचरा डंप किया जा रहा था। शहर में डोर टू डोर कचरा संग्रहण शुरू होने के बाद इस समस्या से निजात के लिए राह तैयार हुई। निगम आयुक्त के अनुसार सेनेटरी पार्क शहर में स्वच्छता अभियान का मॉडल होगा। जल्द ही पार्क दिखने लगेगा। छत्तीसगढ़ में अपनी तरह का यह पहला पार्क होगा। चारों तरफ पौधे लगाए जाएंगे। बीच के हिस्से को पर्यटन और आजीविका के हिसाब से डेवलप किया जाएगा।
सेनेटरी पार्क के लिए तैयार की गई जगह जहां कभी कचरों का ढेर रहता था।
जमीन के कीटाें से निपटने होगा काम
अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से इस स्थल पर कचरा डंप होने के कारण जमीन को मूल स्वरुप में लाने के लिए कई तरह के काम किए जा रहे हैं। सेनेटरी पार्क के लिए जमीन तैयार हो गई है। जमीन के भीतर कीटाणुओं से कोई नुकसान न हो इसके लिए रविवार से एनाकुलम का काम शुरू होगा। जमीन में जगह-जगह राड से छेद कर उसमें कीटनाशक दवाएं डाली जाती हैं। इससे जमीन के भीतर कीड़े मर जाते हैं।
सेनेटरी पार्क में ये होंगे खास
सेनेटरी पार्क में मेडिकल वेस्ट के लिए प्लांट तैयार किया जाएगा। वेस्ट मैनजमेंट का ट्रेनिंग सेंटर भी यहां बनेगा। बायोडाइजेस्टर भी यहां होगा( शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड में इसी तरह से बायो गैस सयंत्र लगाया जा रहा है। डोर टू डोर सफाई अभियान में आने वाली अनुपयोगी खाद सामग्रियों के उपयोग से बायो गैस तैयार की जाएगी। गीले कचरे से खाद तैयार की जाएगी। सोलर पैनल लगाकर बिजली भी तैयार की जाएगी।