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सीमा से सटे साल्हेकसा एवं देवरी तहसील में मलेरिया का प्रकोप

4 वर्ष पहले
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मलेरिया मुक्त महाराष्ट्र एवं वर्ष 2030 तक मलेरिया मुक्त भारत के लक्ष्य के बावजूद अब तक जिले में (लैंबड़ा सायहॉलेथ्रिन 10 प्रतिशत) पावडर उपलब्ध नहीं हो पाया है। इससेे जिले में मच्छरों का उत्पत्ति तेजी से बढ़ रही है और मलेरिया का खतरा दिनों दिन बढ़ते जा रहा है। मलेरिया के मरीजों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बना हुआ हैै। देवरी एवं साल्हेकसा ब्लॉक में मलेरिया का सर्वाधिक प्रकोप है।

दोनों ब्लॉक के 91-91 गांवों में मलेरिया के सर्वाधिक मरीज पाए गए हैं। अर्जुनी मोरगांव ब्लॉक के 49 गांव, सड़क अर्जुनी ब्लॉक के 34 गांव, गोंदिया ब्लॉक के 22 गांव, आमगांव ब्लॉक के 18 गांव, गोरेगांव ब्लॉक के 16 गांव एवं तिरोड़ा ब्लॉक के 8 गांवों में मलेरिया का संभावित खतरा होने के कारण इन 329 गावों में दवा (सायहॉलेथ्रिन 10 प्रतिशत पावडर) का छिड़काव जरूरी है, लेकिन नियोजन के अभाव के कारण मलेरिया और भी तेजी से बढ़ रहा है। जून में पावडर का छिड़काव होना था, लेकिन इसके बावजूद भी जिले में अब तक छिड़काव तो दूर, पावडर भी उपलब्ध नहीं हो पाया है। इस वजह से जिले के 329 गांवों के 3 लाख 698 नागरिकों पर मलेरिया का खतरा बना हुआ है। प्रशासन के इस लचर कार्यप्रणाली से नागरिकों में आक्रोश है।

मलेरिया रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत शासन की ओर से प्रतिवर्ष जून में मलेरिया प्रतिरोधक माह के रूप में मनाया जाता है। जानकारी के अनुसार अमरावती में 1300 किलो पावडर उपलब्ध है। जिसे गोंदिया ले जाने के लिए सूचना दी गई थी लेकिन अब तक पावडर नहीं लाया गया है। उस पावडर में लगभग 204 गांवों में पहले चरण का छिड़काव हो सकता है। गोंदिया डीएमओ प्रभारी डा.सीआर टेंभुर्णे का कहना है कि जिला स्वास्थ्य विभाग ने 6 टन पावडर की मांग शासन से की थी। जिसे मंजूरी भी मिल गई।

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