आधार कार्ड बनवाने के लिए परेशान हो रहे हैं ग्रामीण
इलाके के लोग आधार कार्ड बनवाने के लिए 50 से 60 किमी की दूरी तय करके जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं लेकिन कार्ड बनवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। ग्रामीणों में दुधमुंहें बच्चों के साथ पहुंचने वाली महिलाएं व पेंशनर वृद्ध महिला पुरुष भी शामिल हैं जिन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
खुले में बिता रहे रात
कई योजनाओं में जरूरी किए जाने के चलते लोग कार्ड बनवाने समूहों में आ रहे हैं। ग्रामीण अगले दिन काम बनने की उम्मीद लिए रुक तो जाते हैं, लेकिन ठहरने के लिए छत और भोजन न होने से कुछ ग्रामीण अपने साथ लकड़ी, बर्तन, चावल लेकर पहुंच रहे हैं, जो देर होने पर भोजन पकाकर खुले आसमान के नीचे रात गुजारते हैं। कटेकल्याण ब्लॉक के ग्राम सूरनार से पहुंचे हुंगा ने बताया कि पहले एक बार आधार कार्ड बनवाने वाले लोग गांव तक आए थे, लेकिन कुछ कार्ड बनवाने के बाद लौट आए। अब राशन कार्ड से चावल और बैंक खाता समेत अधिकांश दस्तावेज में आधार कार्ड मांगा जा रहा है, इसलिए गांव के सौ से ज्यादा ग्रामीण सामूहिक रूप से पहुंचे हैं। काम नहीं बनेगा तो रात में रुकना पड़ेगा।
4 सेंटरों पर ही बन रहे कार्ड
जिले भर में केवल 4 स्थाई सेंटर पर ही कार्ड बनवाए जा रहे हैं, जिनमें से किरंदुल, बचेली में 1-1 व दंतेवाड़ा में 2 सेंटर है। इसके पहले शुरूआती दौर में ग्राम पंचायतों में टीम पहुंचकर लैपटॉप और अन्य मशीनों की मदद से कार्ड के लिए थंब व पंजे का बायोमीट्रिक इंप्रेशन, आंखों की पुतलियों की इमेज कलेक्ट कर रही थीं। बाद में हुए कुछ विवाद के बाद ठेका लेने वाली कंपनियों ने इस काम से हाथ खींच लिया।
जगदलपुर | कटेकल्याण ब्लॉक के धनीकरका से पहुंचे बुजुर्ग महिला-पुरुष भी आधार कार्ड बनवाने कर रहे लंबा इंतजार।
शिविर लगाने के लिए किए जा रहे प्रयास
फिलहाल 4 सेंटर पर ही कार्ड बनवाने का काम चल रहा है। जिले में 2.77 लाख कार्ड बनवाए जाने हैं, जिनमें से करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। बच्चों का भी कार्ड बनवाया जाना है। लोगों की दिक्कत को देखते हुए और मशीनें उपलब्ध करवाने या शिविर लगाने पत्र लिखा गया है। आशीष देवांगन, डिप्टी कलेक्टर व नोडल अधिकारी, आधार कार्ड पंजीयन दंतेवाड़ा