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अटकी डाकघर की कोर बैंकिंग

7 वर्ष पहले
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बस्तरके सभी डाकघरों को कंप्यूटराइज्ड किया जा चुका है। हर पोस्ट आफिस में होने वाले हर दिन के काम-काज का पूरा डाटा रायपुर, दिल्ली में अफसरों को भेजा जाना जरुरी रहता है। वहीं बस्तर में सबसे बड़ी दिक्कत खासतौर पर दक्षिण-पश्चिम के आवापल्ली, भैरमग़ढ़, दोरनापाल, कोंटा समेत कुछ इलाके ऐसे हैं कि जहां बीएसएनएल का नेटवर्क काफी कमजोर रहता है। अक्सर स्थिति यह हो जाती है कि डाटा भेजने अफसरों को पसीना छूट जाता है। प्राइवेट कंपनी के नेटवर्क का सहारा ऐसी स्थिति में लेना पड़ता है। उनसे भी कोई खास राहत डाक विभाग के अफसरों को नहीं मिल पाती। इसके अलावा दिक्कत यह है कि उपभोक्ताओं के लिए शुरू की जाने वाली डाक डिलेवरी विभिन्न योजनाएं प्राइवेट कोरियर से पिछड़ जाती है। अंदरूनी, ग्रामीण इलाकों में डाक विभाग की सर्विस जरुर ठीक रहती है, लेकिन प्रदेश के दूसरे हिस्सों में निजी कोरियर कंपनियों से पिछड़ जाती है। इन कंपनियों की सर्विस की रफ्तार तेज रहती है।

}बैंकों से कंपीटीशन की तैयारी कर रहा डाक विभाग।

}साल भर से नहीं लग पा रही एटीएम मुख्य डाकघर में।

भास्करन्यूज | जगदलपुर

डाकघरोंमें काम-काज बढ़ाने नित नई मशक्कत हो रही है। लोगों को बैंकों जैसी सुविधाएं देने के लिए डाकघरों में कोर बैंकिंग शुरू करने एक-डेढ़ साल से कवायद चल रही है।

कुछ दिन पहले मुख्य डाकघर के साथ बचेली, कांकेर शहर के दो-तीन डाकखानों में कोर बैंकिंग शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक यह काम हो नहीं पाया है। सारी एक्सरसाइज अभी प्रोसेस और ट्रेनिंग में अटकी हुई है। कोर बैंकिंग से पहले ट्रायल होना है। इसके अलावा कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलवाया जाना है। इतना ही नहीं जगदलपुर के हेड आफिस में एक एटीएम भी शुरू होना था।

इस पूरी पहल का मकसद था डाकघर की बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा में टिक सके। पोस्टमास्टर डीएन बेन के मुताबिक कोर बैंकिंग को शुरू करवाने के लिए तमाम तैयारियां चल रही हैं। काफी कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी पूरी करवाई जा रही है। जल्द ही यह सुविधा लोगों को मिल जाएगी।