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कानूनी उलझन से मुक्ति पाने पड़ियोरखोज में होती है आराधना

6 वर्ष पहले
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यहांसे 10 किमी दूर गुरवंडी और खेड़ेगांव के जंगल के बीच पहाड़ी चट्टान पर एक क्षत्रिय योध्दा के दाहिने पैर का पंजे का निशान इलाके के लोगों के लिए आस्था का स्थल है। यहां चट्टान पर 4 इंच गहरे पैर का पंजा का निशान है।

माना जाता है कि दूसरा बांया पैर यहां से 12 कोस दूर लेयाह मेटा के जंगल में पत्थर पर है। इस निशान को ग्रामीण स्थानीय बोली में पड़ियोर खोज कहते है। इलाके के लोग मानते हैं कि यहां आकर आराधना करने से कानूनी उलझनों से मुक्ति मिलती है।

स्थानीय बोली में पड़ियोर का मतलब क्षत्रिय और खोज का मतलब पैर का निशान है। इस पद चिन्ह के आगे जंगल में कटी हुई मानव मुंड की आकृति भी है जिसे ग्रामीण शीतला स्थल पर रखकर वर्षो से पूजा पाठ करते रहे है। जब यह प्रतिनिधि पड़ियोर खोज के स्थान पर पहुंचा तो आश्चर्य हुआ कि पत्थर की चट्टान पर आदमी के पैर के स्पष्ट निशान मौजूद है।

शेषपेज 18 पर

कीचड़में फंसे पंजे को वापस खींच लेने पर जो आकृति बनती है वैसे ही दाहिने पैर के पंजे का निशान मौजूद है। इलाके के ग्रामीण इसे 2 हजार वर्ष पूर्व क्षत्रिय योध्दा के पैर का निशान मानते है। ग्रामीण बताते है कि यहां जबरदस्त लड़ाई हुई भी जिसके प्रमाण के तौर पर जगह जगह कटे हुए मानव अंगों के टुकड़े पत्थर के रूप में हैं।

पड़ियोर खोज के स्थान पर 22 गांव के ग्रामीण साल में 2 बार एकत्र होकर बैठते हैं। यहां आने वाले लोगों का कहना है कि यदि गांव पर कोई कानूनी दांव पेंच, जेल में बंदी जैसी उलझनें आती हैं तो पड़ियोर खोज के स्थान पर आकर विनती करने से समस्या हल हो जाती है। ग्रामीण लक्ष्मण दुज्गा, मनीराम गोटा, दुर्जन दर्रो, रैयजी कोवाची, रामजी दुज्गा ने बताया कि जब भी गांव या इलाके में कोई कानूनी उलझनें आती है तो सभी लोग एक साथ पड़ियोर खोज जाकर आराधना करते हैं तो समस्या का समाधान हो जाता है। ग्रामीण कहते है कि इस स्थान पर महिलाएं भी जाती है और वरदान मांगती है।

पास है बिलई मांडी देवी का स्थान

जंगलमें पहुंचने के बाद पता चला कि आसपास ही बिलई मांड़ी वो स्थान है, जो आदिवासी समाज की अाराध्य बिलई मांड़ी देवी का स्थान है। निर्जन जगह पर एक पेड़ के नीचे स्थान पर पैसे भी चढ़े हुए थे। ग्रामीण दुर्जन दर्रो ने बताया कि जब भी खेतों में पहली फसल निकलती है तो उसे बिलई माड़ी में जरूर चढ़ाते है। इस जंगल से गुजरने वाले प्रत्येक व्यक्ति का ध्यान पत्थर नुमा बिलई मांडी की ओर जरूर जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि आदिवासी समाज की आस्था का स्थान बिलई मांडी में अब देव मेला आयोजन किए जाने की तैयारी की जा रही है।

बड़गांव. पड़ियोर खोज का वह स्थान जहां बैठकर लोग करते हैं आराधना।

बड़गांव. वह स्थान जहां चट्टान में हैं पंजे के निशान।