उठक-बैठक करने से दो छात्राएं बीमार
गुड़भेलाब्लॉक गुडुंगामाल आश्रम स्कूल में शिक्षिका द्वारा छात्राओं को सजा देने का मामला प्रकाश में आया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल पहुंचकर इस मामले की जांच शुरू कर दी है। उधर घटना के सामने आने के बाद आरोपी शिक्षिका को गिरफ्तार करने एवं नौकरी से बहिष्कृत करने की मांग पर अभिभावक, वीईसी कार्यकर्त्ता, महिला संगठन के कार्यकर्त्ता एवं ग्रामीणों ने स्कूल फाटक के सामने धरना दिया।
जानकारी के मुताबिक बुधवार शाम को किसी बात को लेकर शिक्षिका मिता भोई ने आश्रम में रहने वाली 77 छात्राओं से दो सौ बार उठक-बैठक कराई थी, जबकि उनमें से दो छात्राओं को अतिरिक्त सौ बार उठक-बैठक करने की सजा दी गई थी। इससे दोनों छात्राओं की तबियत खराब हो गई। दोनों छात्राओं को इलाज के लिए गुड़भेला अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद आरोपी शिक्षिका के खिलाफ गुड़भेला पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज की गई।
मामला प्रकाश में आने के बाद घटना का जांच के लिए शुक्रवार को बलांगीर सदर सहायक जिला मंगल अधिकारी विनोद चंद्र नायक, मुख्य कार्यालय के सहायक जिला मंगल अधिकारी ज्ञान रंजन सामंतराय एवं गुड़भेला मंगल संप्रसारण अधिकारी मलय रंजन चिनारा आश्रम में पहुंचे। जबकि उसी दिन अन्य तीन छात्राओं की हालत गंभीर होने पर प्रधान शिक्षक ने उक्त छात्राओं को गुड़भेला अस्पताल पहुंचाया था।
साथ ही डॉ. प्रशांत धरुआ के नेतृत्व में एक डॉक्टरी टीम ने आश्रम पहुंचकर अन्य छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। दूसरी ओर से आरोपी शिक्षिका को गिरफ्तार करने की मांग पर छात्राओं के अभिभावक, वीईसी कार्यकर्त्ता, मनमोहिनी एवं मां दुर्गा स्वयं सहायक समूह के कार्यकर्त्ता तथा ग्रामीण स्कूल गेट के सामने धरना पर बैठ गए थे। मामले की जांच के लिए पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया, किंतु उन लोगों ने कहा कि जबतक आरोपी शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इसके अलावा मामले की जांच के लिए पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों को भी आश्रम परिसर में रोके रखने की घोषणा आंदोलनकारियों ने कर दी। आखिरकार मामले की रिपोर्ट जिला प्रशासन के पास पहुंचाने के लिए सामंत राय बलांगीर चले गए एवं अन्य दोनों आरोपी आश्रम परिसर में थे। गुड़भेला पुलिस चौकी अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए थे। जबकि शाम को तुषरा थाना आईआईसी गोकुलानंद साहू ने आंदोलनकारियों से बातचीत कर उन्हें समझाया। इसके बाद जाकर आंदोलनकारियों ने आंदोलन समाप्त किया एवं दोनों अधिकारियों को जाने दिया।