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13 साल से अंधेरे में है कर्रेझर का मंजराटोला
शासनहर गांव के घरों में बिजली पहुंचाने का दावा करता है लेकिन कर्रेझर के मंजराटोला बस्ती में अब तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। जिले के गुरूर ब्लाक के अंतिम छोर पर बसे ग्राम पंचायत कर्रेझर की मंजराटोला बस्ती के ग्रामीण आज भी बिजली के लिए मोहताज है। शासन एवं संबंधित विभाग की उदासीनता की वजह से मंजराटोलावासियों को बिजली नहीं मिल पाई है। यहां रहने वाले 12 परिवार के 50 ग्रामीण 13 साल से अंधेरे में ही गुजर-बसर कर रहे हैं। कर्रेझर पंचायत ने आबादी, आवास भूमि आबंटित कर कुछ परिवारों को मंजराटोला में बसा तो दिया है लेकिन बिजली की सुविधा अब तक नहीं दी है। ग्रामीण सियाराम काेर्राम, रामरतन ने बताया कि कर्रेझर से मंजराटोला की दूरी आधा किलोमीटर से भी कम है। इसके बावजूद इस क्षेत्र में पोल का विस्तार नहीं किया गया है। बिजली पोल विस्तार के लिए कई बार पंचायत प्रशासन बिजली विभाग में आवेदन दे चुके हैं। उसके बाद भी अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
संबंधितअफसरों को दे चुके हैं आवेदन : ग्रामीणोंने बताया कि मजराटोला में विद्युत पोल का विस्तार कर बिजली की व्यवस्था करने की मांग को लेकर कलेक्टर जनदर्शन में पांच बार आवेदन दे चुके हैं। इसके अलावा आसपास के गांव कंवर, कोचवाही, बड़भूम, गुरूर में हुए जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में भी संबंधित अफसरों को ज्ञापन दे चुके हैं। ग्रामीण शुकालु, महेश्वर नाथ ने बताया कि ग्राम पंचायत सिर्फ आश्वासन देता है कि जल्द ही पोल का विस्तार हो जाएगा। फिर बिजली की व्यवस्था मिलेगी। ग्रामीण कई साल से यही आश्वासन सुनते रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि बिजली नहीं होने से कई तरह की परेशानी हो रही है।
बारिशके दिनों में बढ़ जाती है परेशानी : ग्रामीणोंने बताया कि बारिश के दिनों में परेशानी और अधिक बढ़ जाती है। वनांचल क्षेत्र होने के कारण रात में कीड़े, मकोड़े घर में घुस जाते हैं। ऐसे में कभी भी अनहोनी घटना होने की आशंका रहती है। महिलाओं ने बताया कि बिजली नहीं होने के कारण रात में खाना बनाने में उन्हें परेशानी होती है। शासन द्वारा घर-घर बिजली पहुंचाने की बात की जाती है लेकिन यहां के ग्रामीण अब तक अंधेरे में ही जीवन यापन कर रहे हैं। रमशीला, सावित्री ने बताया कि चिमनी, दीए के भरोसे रात में खाना बनाना का काम करते है। बारिश के दिनों में तेज तूफान के साथ हवा चलने से चिमनी भी बुझ जाता है