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हवन-पूजन के बाद निकाली विश्वकर्मा की विसर्जन यात्रा
अंचलमें भगवान विश्वकर्मा जयंती दो दिन तक मनाया गया। बुधवार को मूर्ति स्थापना पंडितों के मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से किया गया था। इसके बाद प्रसाद वितरण का कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा। शहर में विभिन्न मिस्त्री, व्यवसायी, बिजली विभाग, टैक्सी यूनियन सहित अन्य संगठनों ने प्रतिमा स्थापित किए थे। जयंती के दूसरे दिन गुरूवार को शहर में विराजित विश्वकर्मा प्रतिमाओं का विसर्जन सुबह से शाम तक हुआ। विसर्जन के पहले विधि-विधान से हवन किया गया। विसर्जन के समय श्रद्धालुओं में उत्साह रहा।
शहर में विराजित भगवान विश्वकर्मा के प्रतिमाओं का विसर्जन सुबह से शाम तक चला। विसर्जन के समय मिस्त्री व्यवसाय कर्मचारियों में उत्साह रहा। युवा डीजे की थाप में झूमते नजर आए। सुबह 11 बजे तक छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। इसके बाद शाम तक बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन नाच, गाने के साथ होता रहा। विसर्जन में शहर के लोगों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। दिनभर छत्तीसगढ़ी, हिन्दी रिमिक्स गानों में झूमते रहे।
शहर के नया बस स्टैंड, गंगासागर तालाब, पांडेपारा बाजार चौक, नयापारा, आमापारा, पांडेपारा, मरारपारा, सदर रोड, गंजपारा, जवाहर पारा, सिंधी कालोनी सहित अन्य जगहों में विराजित विश्वकर्मा के प्रतिमाओं को उठाकर भक्तों ने धूम धड़ाके के साथ विसर्जित किया। विसर्जन के पहले शहर के प्रमुख मार्गो से भ्रमण हुआ। शहर भ्रमण के दौरान ट्रैफिक जाम का नजारा रहा। भक्त रंग, गुलाल उड़ाकर नाच रहे थे। डीजे, धुमाल पटाखों से शहर गूंजता रहा।
विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर दो दिन तक की गई पूजा-अर्चना। गुरुवार को विसर्जन के लिए ले जाते श्रद्धालु।