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कपिलेश्वर में झूले लगे मूर्तियां अब तक उपेक्षित

7 वर्ष पहले
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शहरके नयापारा वार्ड में स्थित कपिलेश्वर मंदिर में झूला लगने से रौनक आई है। नए झूले लगने के बाद बच्चों का आकर्षण बढ़ा है लेकिन अब तक कपिलेश्वर मंदिर के मूर्तियों को संरक्षित करने का प्रयास नहीं किया गया है। मूर्तियां खुले आसमान के नीचे होने की वजह से दिनोंदिन अपना अस्तित्व खो रहा है।

इस ऐतिहासिक मंदिर में रखे मूर्तियों की उपेक्षा होने से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। नागरिकों का कहना है कि झूले लगाने के साथ-साथ मूर्तियां की देखरेख भी होनी चाहिए। देखरेख के अभाव में असामाजिक तत्वों यहां कभी भी प्रवेश कर मूर्तियों को नष्ट करने का प्रयास करते हैं। मंदिर समिति के सदस्यों द्वारा इसकी देखरेख की जाती है। लेकिन रात में कोई देखरेख नहीं होने से असामाजिक तत्वों द्वारा उत्पात मचाया जाता है।

ऐतिहासिकहै मंदिर : कपिलेश्वरको शहर के ऐतिहासिक मंदिरों में गिना जाता है। यहां तालाब के चारों ओर सात मंदिरों का समूह है। जिसे कपिलेश्वर मंदिर समूह के नाम से जाना जाता है। यहां गणेश, राधा-कृष्णा, राम-सीता, दुर्गा, सांई, हनुमान मंदिर है। इसके अलावा एक प्राचीन शिव मंदिर भी है। जिसे कपिलेश्वर मंदिर कहा जाता है। यह एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित है। गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के चारों ओर नागों के अंकन के साथ ही विभिन्न प्रकार के पशुओं का अंकन है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण नागवंशी शासकों के द्वारा किया गया है। यहां अन्य मंदिरों के शिखरों पर भी नागों का कलात्मक रूप अंकित है। कपिलेश्वर मंदिर के दोनों ओर दो चतुर्भुजी गणेश प्रतिमाएं स्थापित है।

जो अतिप्राचीन है।

प्रांगण में विभिन्न प्राचीन प्रतिमाएं रखी हुई है। जिसमें प्रमुख रूप से बेताल देवता, देवी, नाग, शिवपार्वती, गणेश, और नृत्यांगनाएं है। जो बलुआ पत्थरों से निर्मित है। मंदिर में तालाब भी है। जहां हमेशा पानी भरा रहता है। कपिलेश्वर तालाब के मध्य में एक प्राचीन सती स्तंभ भी स्थापित है। वर्तमान में मंदिर में प्रतिमाएं उपेक्षित पड़ी हुई है। मंदिर समिति के सदस्यों द्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार, संरक्षण के लिए शासन एवं पुरातत्व विभाग से कई बार मांग कर चुके है। लेकिन अभी तक इस ओर कोई पहल नहीं की गई है।

नयापारा वार्ड में स्थित कपिलेश्वर मंदिर में लगे नए झूले का आनंद लेते बच्चे।

नयापारा वार्ड स्थित कपिलेश्वर मंदिर