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दो केंद्रों में अब तक बोहनी नहीं, बाकी में आवक बढ़ी

7 वर्ष पहले
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खरीदीकेन्द्रों में चहल पहल बढ़ी, तेजी से रहा है सोसायटियों में धान। जिले में अब तक 4 लाख 59 हजार 12 क्विंटल धान खरीदी, सिर्फ दो केन्द्रों में बोहनी नहीं हो पाई। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसानों की भीड़ दिनोंदिन खरीदी केन्द्रों में बढ़ती जा रही है। गुरुवार को धान खरीदी का 11 वां दिन रहा। एक दिसंबर से विवादों में शुरू हुए धान खरीदी ने अब जोर पकड़ लिया है।

शासन द्वारा 15 क्विंटल किए जाने के बाद खरीदी केन्द्रों में किसानों की चहल-पहल बढ़ गई है। धीरे-धीरे खरीदी केन्द्रों में किसान धान पहुंच रहे है। वर्तमान में सिर्फ दो ही खरीदी केन्द्र ऐसे है, जहां बोहनी नहीं हो पाई है। घोटिया और मंगलतराई खरीदी केन्द्र में अब तक किसान नहीं पहुंचे है।

धीरे-धीरेखरीदी केन्द्रों में पहुंच रहे है किसान : शुरूके तीन दिन तक जिले के 65 खरीदी केन्द्रों में बोहनी नहीं हो पाई थी। इधर किसान धान बेचने के पक्ष में नहीं थे, उधर शासन भी अपना फैसला बदलना नहीं चाह रहे थे। इसके बाद शासन ने 4 दिसंबर से 15 क्विंटल धान खरीदने का फैसला किया। तब से अब तक धीरे-धीरे खरीदी केन्द्रों में बोहनी शुरू होता जा रहा है।

जनवरीतक होगी लिंकिंग खरीदी : जनवरीमाह तक लिंकिंग खरीदी होगी। ऐसे में किसान चाह रहे है कि जितना जल्दी हो सके, धान बेच सकें, ताकि बाद में परेशानियों का सामना करना पड़े। ज्ञात हो कि इस साल सिर्फ दो माह धान खरीदने का फैसला शासन ने लिया है। जो पिछले साल की तुलना में कम है। पिछले साल अक्टूबर से जनवरी कुल चार माह तक किसानों के धान समर्थन मूल्य पर खरीदें गए थे लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं हो रहा है।

केंद्र में धान को खरीदने के बाद फड़ पर स्टैक बनाकर बोरे को रखा जा रहा है।

70 फीसदी किसान कर चुके हैं धान की कटाई मिंजाई

किसानोंके चहल-पहल के साथ ही खरीदी केन्द्रों में धान की आवक बढ़ती जा रही है। गुरूवार को 11 वें दिन खरीदी केन्द्रों में किसानों की भीड़ रही। वर्तमान में 70 प्रतिशत किसान धान मिंजाई कर उपज तैयार कर चुके है। सिर्फ बेचना बाकी है। टोकन सिस्टम से केन्द्रों में धान खरीदी की जा रही है। जैसे-जैसे टोकन कटता जा रहा है, वैसे-वैसे तिथि अनुसार केन्द्रों में किसानों के पहुंचने का सिलसिला चल रहा है।