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कमरौद में अब तक नहीं बना हाईस्कूल का नया भवन
माध्यमिक शाला में संचालित हो रही है हाईस्कूल की कक्षाएं
भास्करन्यूज|बालोद
जिलामुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर ग्राम कमरौद में शिक्षा व्यवस्था अब तक सुधर नहीं पाई है। माध्यमिक शाला में ही हाईस्कूल की कक्षाएं संचालित हो रही है। इस वजह से विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है।
विद्यार्थी पालक कई बार शिक्षा विभाग एवं जनप्रतिनिधियों को हाईस्कूल नवीन भवन की मांग कर चुके हैं। लेकिन अब तक ग्रामीणों की फरियाद पर कोई सुनवाई नहीं हो पाई है। नतीजतन आज भी स्कूली विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। गांव में उच्च शिक्षा के लिए उच्चतर माध्यमिक शाला तो संचालित हो रही है लेकिन इसका लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है।
हाईस्कूल की कक्षाएं माध्यमिक स्कूल में लगने की वजह से विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक की कक्षाएं सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक संचालित हो रही है। वहीं माध्यमिक कक्षाएं दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक लग रही है। इसके बाद भी विद्यार्थियों को पर्याप्त जगह पढ़ने लिखने के लिए नहीं मिल पा रहा है। मजबूरीवश विद्यार्थी पर्याप्त जगह नहीं होने के बावजूद अपना भविष्य गढ़ रहे हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि बैठक व्यवस्था सही नहीं होने की वजह से परेशानी होती है लेकिन क्या करें, मजबूरी है। पालकों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
दीवारोंपर पड़ रही दरारें : स्कूलभी जर्जर होता जा रहा है। स्कूल की दीवारों से छड़ उभरकर सामने दिखने लगा है। इससे स्कूल की जर्जरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। दीवार में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई है। जिससे कभी भी प्लास्टर गिर सकता है। स्कूल की जर्जरता को देखते हुए स्टाफ रूम को बदल दिया गया है। वहीं स्कूल को बरामदे में शिफ्ट किया गया है। बारिश के दिनों में स्कूल के छत से पानी टपकते हैं।
जर्जर हो चुकी है स्कूल की दीवारें।
जर्जर हो जाने के कारण बदला गया स्टॉफ क्वार्टर।
पेयजल समस्या से जूझ रहे, बोरिंग का गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं स्टूडेंट्स
स्कूलमें विद्यार्थियों को पेयजल समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल में पानी के लिए बोरिंग तो है लेकिन इसमें हमेशा गंदा पानी आता है। इस वजह से कई विद्यार्थी अपने घर से बाटल में पानी लेकर आते हैं। वहीं ज्यादातर बच्चे मजबूरीवश पानी का सेवन कर रहे हैं। इससे जलजनित रोग होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। माध्यमिक स्कूल के विद्यार्थी मध्यान्ह भोजन करने के बाद इसी बोरिंग में बर्तन धोने पानी पीने के लिए आते हैं।
मोटर पंप लगाया
^स्कूलोंमें हो रही विद्यार्थियों की परेशानियों के संबंध में अवगत कराया जा चुका है। बाेरिंग में नया मोटर पंप लगाया गया था। लेकिन बार-बार खराब होने की वजह से निकाल दिया गया। नया मोटर पंप लगाया जाएगा। अभी पानी साफ रहा है। पीआरदेशलहरे, हेडमास्टर, कमरौद स्कूल
आसपास नहीं है कोई स्कूल, खेल मैदान भी नहीं
क्षेत्रके आसपास स्कूल नहीं होने की वजह से विभिन्न गांव के बच्चे कमरौद में ही दाखिला लेते हैं। यहां कक्षा 12 वीं तक की कक्षाएं संचालित होती है। लेकिन यहां पढ़ने वाले बच्चों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। स्कूल में चारों ओर बाउंड्रीवाल नहीं है। सिर्फ प्रवेश द्वार तक ही बाउंड्रीवाल बनाकर अाधा-अधूरा छोड़ दिया गया है। स्कूली बच्चे अपने पालकों के साथ विभाग अधिकारियों के समक्ष ज्ञापन के माध्यम से समस्याओं को सामने रख चुके हैं।
स्कूल परिसर में पीने के पानी का एकमात्र स्रोत हैंडपंप है। यहां गंदा पानी निकलता है। फिर भी स्टूडेंट्स पीने के लिए मजबूर हैं।