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80 प्रतिशत जनता खेती पर निर्भर, जिले को चाहिए कृषि कॉलेज अनुसंधान केंद्र
कृषिप्रधान बालोद जिले में एक भी कृषि कालेज और अनुसंधान केन्द्र की स्थापना नहीं हुई है। यहां की 80 प्रतिशत जनता आज भी कृषि पर निर्भर हैं। वर्ष 2012 में जब बालोद को जिला बनाया गया तो लोगों को लगा कि अब कृषि अनुसंधान केंद्र खुलेगा और जिले का विकास होगा लेकिन लोगों की यह मांग अब तक मांग अब तक पूरी नहीं हो पाई है। अब राज्य और केन्द्र में दोनों पार्टी एक है तो लोगों की मांग एक बार फिर उठने लगी है।
जिले में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग 12 साल पुरानी है। सीएम ने विकास यात्रा के समय नए जिले बेमेतरा को कृषि कालेज की सौगात दी थी लेकिन बालोद को यह सौगात देना भूल गए। गौर करने वाली बात यह है कि जिस समय सीएम ने बेमेतरा वासियों को कृषि कालेज की सौगात दी थी। उस समय वहां कांग्रेस के विधायक थे। जबकि बालोद में भाजपा के विधायक विराजमान थे। अब जिले की स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। इसके बाद भी जिलेवासियों को आस है कि सीएम नागरिकों की मांग को पूरा करेंगे।
भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रीतम साहू का कहना है कि कृषि महाविद्यालय, कृषि इंजीनियरिंग महाविद्यालय खुलने से बालोद जिला कृषि क्षेत्र में तेजी से अग्रसर होगा। युवा वर्ग जो आज खेती से विमुख हो रहे हैं। वे कृषि के बारे में नई-नई जानकारी हासिल कर नए -नए प्रयोग करेंगे। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हलधर साहू का कहना है कि यदि यहां कृषि कालेज खुलता है, तो इसका फायदा शुगर मिल को भी होगा। किसानों को भी नई तकनीक सीखने का मौका मिलेगा। धान ही नहीं किसान अन्य फसल जैसे गन्ना, सरसों, ज्वार बाजरा, गेहूं, सूरजमुखी का रकबा भी किसान बढ़ाएंगे। जिनसे किसानों को काफी फायदा मिलेगा। साथ ही आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
कांग्रेस के विधायक भैयाराम सिन्हा का कहना है कि आज धान को छोड़ अन्य दलहनी, तिलहनी फसलों के उत्पादन की उन्नत तकनीक की जानकारी नहीं होने से रकबा कम है। जिले में शक्कर कारखाना होने के बाद भी यहां गन्ना नहीं है। दूसरे जिलों पर आश्रित होकर शक्कर कारखाना चलाया जा रहा है। यदि यहां गन्ना का रकबा बढ़ेगा तो कारखाना भी ज्यादा दिन तक चलेगा। किसान नेता पवन साहू का कहना है कि कृषि कालेज के अलावा जिले में उद्यानिकी महाविद्यालय की स्थापना भी बहुत जरूरी है। इससे फूलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा। जिले में झलमला,अछोली, कुसुमकसा सहित कुछ स्थानों पर ही उद्यानिकी