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आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा

7 वर्ष पहले
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आयुषपंचकर्म चिकित्सालय के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है। रोज 30 मरीज आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। आयुर्वेदिक दवाइयों से कोई साइड इफैक्ट नहीं होने की वजह से भी लोग इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। पैर, हाथ, मुंह, पेट, बाल, एसिडिटी, कब्ज, खांसी, मुंह के छाले, मधुमेह, बुखार, चक्कर आना, वात, से संबंधित पीड़ित व्यक्ति केन्द्र में पहुंचकर दवाइयां ले जा रहे हैं।

आयुष पंचकर्म चिकित्सालय में उपलब्ध दवाइयां।

^गांवों में शिविर के माध्यम से आयुर्वेदिक दवाइयों की जानकारी दी जा रही है। पहले की अपेक्षा अब लोगों का रुझान बढ़ा है। जिले में 32 फार्मासिस्ट हैं, जो जिले के सभी औषधालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जल्द ही विशेषज्ञों की भर्ती की जाएगी।\\\'\\\' डा.एमएन योगी, नोडलअधिकारी

अभी भी दुर्ग पर है निर्भर

बालोदको जिला बने दो साल और 9 माह हो चुके हैं। इसके बाद भी यहां जिला आयुर्वेद अधिकारी की पदस्थापना नहीं हुई है। इस वजह से यहां की रिपोर्ट दुर्ग भेजी जाती है। दवाईयों के अभाव होने के बाद मांग पत्र दुर्ग के अधिकारी के भेजा जाता है। इसके बाद वह अधिकारी मांग के हिसाब से अपना रिपोर्ट रायपुर के अधिकारी को भेजते हैं।

गांवों में विशेषज्ञों की कमी

ग्रामीणक्षेत्र में आयुर्वेदिक अस्पतालों की हालत खराब है। इन अस्पतालों में फार्मासिस्ट विशेषज्ञों की कमी होने के कारण लोगों को समय पर इलाज सुविधा नहीं मिल पा रही है। जिले में कुल 52 औषधालय के माध्यम से ग्रामीणों को आयुर्वेदिक दवाइयां मिल रही है। कई औषधालय ऐसे है, जहां विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है।

रोज पहुंच रहे 30-35 मरीज

पंचकर्म स्पेशलिस्ट डा. पूर्णिमा सिंह ने बताया कि वर्तमान में 30 से 35 मरीज आयुर्वेद पंचकर्म स्वास्थ्य केन्द्र में पहुंच रहे हैं। सुबह 8 से दोपहर एक बजे और शाम 5 से 6 बजे कुल दिन में छह घंटा केन्द्र खुला रहता है। उन्होंने बताया कि पंचकर्म पद्धति, शिरोधरा पद्धति के माध्यम से सिकाई, मालिश किया जा रहा है। इससे मरीजों को लाभ मिल रहा है। केंद्र में कुछ महत्वपूर्ण दवाईयों की कमी है। इस संबंध में दुर्ग के उच्चस्तरीय अधिकारियों को मांग पत्र दिया जा चुका है। साल में दो बार दवाई का वितरण होता है।