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पालिका से गुम हुआ मास्टर प्लान शहर विकास की योजना अटकी

5 वर्ष पहले
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अब नगर पालिका कार्यालय में भी नहीं है मास्टर प्लान का कोई रिकार्ड

भास्कर न्यूज|बालोद

बालोद विकास योजना 2021 के तहत बालोद शहर के विकास के लिए मास्टर प्लान कागज में बनकर रह गया। जिला बनने के बाद ये मास्टर प्लान कहां गुम हुआ, ये किसी को नहीं मालूम। हकीकत ये भी है कि नगर पालिका में मास्टर प्लान का अब न तो कोई रिकार्ड है और न हीं कोई फाइल है।

राजस्व अधिकारी रिकार्ड खंगाल रहे हैं। उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ। इधर बिना मास्टर प्लान के जिला बनने के बाद शहर में जैसा पाए वैसा निर्माण किया जा रहा है। जिला व नपा प्रशासन का दायरा कहां से कहां तक है, ये अब तक किसी को समझ में नहीं आया। मास्टर प्लान में उन सभी बातों का उल्लेख है। जिनसे शहर का सुव्यवस्थित विकास हो सकता है। ये गंभीर मामला है कि प्लान का कोई फाइल नपा दफ्तर में नहीं है। जिला बनने से पहले शहर का विकास करने के लिए 2008 में मास्टर प्लान बनाया गया। 11 जुलाई 2008 को आवास एवं पर्यावरण विभाग मंत्रालय रायपुर ने छत्तीसगढ़ नगर व ग्राम निवेश अधिनियम के प्रावधानों के तहत राज्य में बालोद के मास्टर प्लान के संबंध में सूचना को प्रकाशित किया था।

चार विभागों की है मुख्य जिम्मेदारी
मास्टर प्लान के क्रियान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी नगर पालिका की है। इसके साथ ही गृह निर्माण मंडल, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई), पीडब्ल्यूडी द्वारा भी अपने संबंधित क्षेत्र में निर्माण कार्य किया जाना है। नपा ने मास्टर प्लान लागू करने के संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की है। जिसके कारण शहर के प्रथम चरण में 2011 तक होने वाले विकास व जरूरत की पूर्ति नहीं हो पाई है।

नगर में इस प्रकार है विकास की योजना
प्लान के अनुसार ब्रिटिश जमाने से बने तांदुला सूखा बांध के लिए आरक्षित रखी गई, सिंचाई विभाग की भूमि में बाटनिकल गार्डन यानी वनस्पति उद्योग बनाया जाएगा। एक ऐसे बायपास का भी निर्माण किया जाना है, जो सिर्फ रेलवे रेक प्वाइंट की ट्रकों का नहीं बल्कि शहर से होकर जाने वाले सभी भारी वाहनों के कारण होने वाले ट्रैफिक के दबाव को कम कर सके। बघमरा में ग्रीन सिटी प्रस्तावित है।

इन कार्यों का समावेश है मास्टर प्लान में
शासकीय गजट में प्रकाशित मास्टर प्लान में कहा गया है कि बालोद विकास योजना का प्रथम चरण 2011 तक आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा। बालोद विकास योजना 2021 प्रारूप के पुस्तक में भी इस बात का उल्लेख है। प्लान के लागू होने से शहर सुंदर सुव्यवस्थित होगा। जो भी विकास कार्य होंगे, योजना के अनुरूप होंगे।शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होगा। प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी। नपा क्षेत्र का विस्तार व विकास होगा। नपा के राजस्व खाते की आय में वृद्धि होगी। घनी आबादी व आवास की समस्या दूर होगी।

जब पार्षद रहे तब प्रशासन से की मांग
नगर पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा पिछले पंचवर्षीय में पार्षद रहे तो उन्होंने प्रशासन से मास्टर प्लान के अनुसार विकास कार्य करने की मांग की थी। आज वे स्वयं अध्यक्ष है तो उनके हाथ में प्लान का कोई कागज भी उपलब्ध नहीं है। मुझे भी हैरानी हुई कि भाजपा अध्यक्ष के कार्यकाल तक मास्टर प्लान से विकास होने की बातें होती रही। अब नपा के दफ्तर में कोई रिकार्ड नहीं है। प्लान में 2021 तक होने वाले विभिन्न विकास कार्यो की परिकल्पना की गई। आठ साल बीत गए प्लान के अनुसार काम नहीं हुए।

तत्कालीन कलेक्टर से भी की गई थी मांग
कांग्रेस समर्थित पार्षदों ने मुख्यमंत्री को 22 मई 2014 को व तत्कालीन कलेक्टर को 23 मई 2014 को ज्ञापन सौंपकर मास्टर प्लान लागू करने के साथ इसके पालन करने की मांग की थी। आज तक इस मसले पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। दो साल बाद स्थिति उल्टी है। नगर पालिका में कांग्रेस अध्यक्ष व विभागों में भी कांग्रेस के सभापति है। फिर भी मास्टर प्लान को सभी ने भूला दिया है। बालोद जिला बनने के बाद भी यहां मास्टर प्लान के तहत शहर का विकास नहीं हो पा रहा है।

शहर के विकास के लिए मास्टर प्लान बना था। जब हम पार्षद थे तो इसके क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर से मांग भी किए थे। नपा में इसका कोई रिकार्ड ही नहीं है। राजस्व विभाग के अफसरों को निर्देशित किया है कि मास्टर प्लान कि फाइल तलाशे। विकास चोपड़ा, अध्यक्ष, नपा

बालोद। बालोद जिला बनने के बाद मास्टर प्लान के तहत शहर का विकास नहीं किया जा रहा है।

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