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कचरे से पट रहा तांदुला नहर वार्डवासी की बढ़ रही परेशानी

7 वर्ष पहले
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दो किमी लंबी है नहर, विभाग ने सफाई की ओर नहीं दिया ध्यान

आमापारासे बहने वाली तांदुला नहर में कचरों अपशिष्ट पदार्थो का ढेर लगा हुआ है। इससे नहर का अस्तित्व ही समाप्त होने की कगार पर है। तांदुला जलाशय से गर्मी में रबी फसल के लिए पानी दिए जाने की मांग किसान कर रहे हैं। मांग पूरी होती है तो वे फसल लगाएंगे। वहीं नहर की देखरेख नहीं होने से आमापारा वार्डवासियों को परेशानी हो रही है।

वार्डवासियों ने बताया कि हर साल बरसात सिंचाई पानी देने की स्थिति में परेशानी होती है। दो किलोमीटर लंबी नहर कचरे से पटता जा रहा है। विभाग ने अस्थाई नहर का निर्माण किया है। जिसमें घास-फूस उग आए हैं। वार्डवासी पम्मू पिल्ले, धनंजय दास, रामकुमार पटेल, जगतपाल सोनी, सोहन सोनी, संजय, रोहित ने बताया कि नहर को सीमेंटीकरण करने की आवश्यकता है ताकि घास-फूस ना उगे।

व्यर्थबहता है पानी: सिंचाईके लिए अस्थाई नहर की व्यवस्था की गई है। रबी फसल के लिए पानी दिया जाता है तो आधा पानी व्यर्थ बहता रहता है। नालियां जाम होने से पानी घरों के सामने जाता है। किसान गड्‌ढे खोदकर अपने खेतों तक पानी पहुंचाते हैं। इसके बाद भी पानी व्यर्थ बहता रहता है।

कुंदरूपारा से गंजपारा तक सीमेंटीकरण नहीं

तांदुलानहर की देखरेख नहीं होने से पर्याप्त मात्रा में पानी सिंचाई के लिए नहीं पहुंच पाता। कुंदरूपारा से गंजपारा तक नहर सीमेंटीकरण नहीं होने से पानी व्यर्थ बहकर घरों के सामने बहता रहता है। बरसात के में तो स्थिति ज्यादा खराब रहती है। वार्ड में कीचड़ फैला रहता है। वार्डवासियों ने नहर सीमेंटीकरण की मांग की है।

तांदुला नहर में कचरों अपशिष्ट पदार्थो का ढेर लगा हुआ है।