ग्रामीणों को साफ पानी पिलाने की तैयारी
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कीटाणु रहित और पूरी तरह से टेस्टेड पीने का पानी नलों से आएगा। इसके लिए राज्य शासन ने जिले के सभी ग्राम पंचायत स्तर पर लैब टेस्टिंग की व्यवस्था करने की योजना तैयार की है।
योजना का क्रियान्वयन जल्द करने पीएचई को निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर के अधिकारी इस दिशा में काम शुरू कर दिए हैं। सर्वे शुरू हो गया है। लेकिन कब तक काम पूरा हो पाएगा, यह विभागीय अधिकारी बता नहीं पा रहे हैं। बहरहाल इस योजना से ग्रामीणों को राहत मिलेगी। गंदा पानी पीने से निजात मिलेगी।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कीटाणु रहित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन ने योजना तैयार की है। ग्राम पंचायत स्तर पर पानी की जांच की व्यवस्था की जाएगी। आरके शुक्ला, ईई, पीएचई
18 पैरामीटरों पर जांच
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जांच से खराबी पता चलेगी
पानी की जांच के दौरान यह स्पष्ट हो जाएगा कि पानी में क्या खराबी है। विभाग की ओर से पानी के ट्रीटमेंट की व्यवस्था भी की जाएगी। जरूरत पड़ने पर पानी साफ करने की मशीन लगाई जाएगी। साफ किया हुआ पानी लोगों तक पहुंचाया जाएगा। ताकि लोगों को साफ पानी मिल सके।
जांच के लिए 18 पैरामीटर्स
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) ने पीने योग्य पानी की जांच के लिए 18 पैरामीटर तय किए हैं। इन पैरामीटर की जांच कर पानी के स्तर को सुधारने पर आम लोगों को पीने के पानी से होने वाली बीमारियों से निजात मिलेगी। पहले पीएचई पानी की जांच करता था। स्थिति जस की तस हो जाती थी।
ग्राम चिचबोड़ में लगाया गया सोलर पैनल
पानी की जांच पहली बार ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) द्वारा तय 18 पैरामीटरों के आधार पर की जाएगी। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति चिंताजनक है। पिछले साल केंद्रीय स्तर पर हुए सर्वे की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिले की 90 फीसदी ग्रामीण आबादी को पीने का पानी बगैर किसी जांच-पड़ताल के उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं कुछ गांवों में लोग आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरनयुक्त पानी पीने मजबूर हैं।
बालोद। चिचबोड़ में सोलर पैनल लगा।
योजना