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शिक्षा विभाग इस सत्र से बच्चों को पढ़ाएगा स्कूलों का इतिहास
जिलेके हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों के विद्यार्थियों को अपने-अपने स्कूल के इतिहास की जानकारी देने की पहल शिक्षा विभाग ने जनवरी से शुरू कर दी है। डीईओ ने सभी स्कूलों के प्राचार्यों से 10 बिंदुओं पर स्कूल संबंधित जानकारी मांगी थी। जिसके आधार पर सभी स्कूलों के इतिहास की किताब बनाए जाने की तैयारी चल रही है।
शिक्षा विभाग की पहल पर जिले के 174 स्कूलों का एक प्रोफाइल तैयार किया जाएगा। जिसमें स्कूल के इतिहास का संकलन होगा। इतिहास को संकलित कर पुस्तक बनाया जाएगा। इसके बाद पुस्तक का वितरण जिले के सभी स्कूलों में किया जाएगा। शिक्षा विभाग के इस पहल से स्कूली विद्यार्थियों को अपने स्कूल से संबंधित सभी जानकारी मिल जाएगी। पहले 26 जनवरी को किताब प्रकाशित कर विमोचन किया जाना था लेकिन कुछ स्कूलों के प्रोफाइल डाटा नहीं मिल पाने की वजह से निर्धारित समय में पुस्तक का विमोचन नहीं हो पाया। विभाग का प्रयास सफल होने के बाद विद्यार्थियों के अलावा शिक्षक ग्रामीणों को भी स्कूल संबंधी जानकारी मिल जाएगी।
विद्यार्थियोंको मिलेगी ये जानकारी : वर्तमानमें शहर गांव में संचालित स्कूलों के ज्यादातर विद्यार्थियों नागरिकों को स्कूल का इतिहास मालूम नहीं है। जैसे स्कूल की स्थापना, निर्माण वर्ष, पहला प्राचार्य कौन था। स्कूल का नाम अगर किसी व्यक्ति पर है तो स्कूल का नाम उस व्यक्ति के आधार पर क्याें पड़ा, उस व्यक्ति की उपलब्धि, शाला की उपलब्धि, बच्चों की उपलब्धि जैसे अन्य रोचक जानकारियोें के साथ पुस्तक प्रकाशन करने की तैयारी जिला शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही है। विद्यार्थियों को अपने स्कूल से संबंधित इतिहास के बारे में जानकारी नहीं रहती। इसलिए विभाग नए प्रयोग करना चाह रही है।
प्राचार्यों से इन 10 बिन्दुओं पर मांगी है जानकारी
1. स्कूलयदि किसी व्यक्ति के नाम पर है तो उस व्यक्ति की पृष्ठभूमि क्या है।
2.प्राथमिकशाला कब खुला। क्योंकि गांव में सबसे पहले प्राथमिक शाला संचालित हुआ। इसके बाद ही शाला का उन्नयन हुआ।
3.प्राथमिकस्कूल कब मिडिल हाईस्कूल की श्रेणी में आया।
4.इसप्रक्रिया में किसी का योगदान रहा या नही
5.शालामें उपलब्ध सुविधाएं और समस्याएं ताकि निराकरण किया जा सकें।
6.स्टाफऔर कर्मचारियों की जानकारी
7.शालासंचालन की गतिविधि
8.समस्याएंसमय सारिणी, पालक समिति के कार्य
9.मेरिटलिस्ट, शाला की विशेष पहचान किस बात पर है।
10.शालाका नाम क्या है।
जानकारी के बाद प्रकाशन
^प्राचार्योंको इतिहास संबंधी जानकारी एकत्र करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्राचार्यों के माध्यम से जानकारी रही है। सभी स्कूलों की जानकारी आने के बाद पुस्तक प्रकाशित की जाएगी। उसके बाद विमोचन किया जाएगा। एसकेभारद्वाज, डीईओ, बालोद