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नवरात्र पर्व

7 वर्ष पहले
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पंडालों में विराजीं दुर्गा, मंदिरों में जले दीप

अंचलमें गुरूवार से दुर्गोत्सव की शुरूआत हुई। दोपहर से शाम तक जगह-जगह मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना जोत प्रज्जवलित किए गए। सुबह 10 बजे से ही श्रद्धालुओं की टोली बाजे-गाजे के साथ मां दुर्गा की प्रतिमाएं ले जाते दिखे।

जो शाम तक जारी रहा। श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह था। श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए माता सेवा, भजन के साथ स्थापित स्थल तक ले गए। अब नौ दिनों तक अंचल में श्रद्धा-भक्ति का वातावरण रहेगा।शहर के विभिन्न वार्डों, गलियों, चौक-चौराहों, धार्मिक स्थलों सार्वजनिक स्थानों पर मां दुर्गा की स्थापना की गई है। मौसम खुला रहने से धूप गर्मी का अहसास हुआ। इसके बावजूद श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखा गया। सभी जगहों पर मिट्टी से बने प्रतिमाएं विराजित की गई है।

दुर्गोत्सव को लेकर बच्चे, बुजुर्ग, पुरुष, महिलाएं सभी वर्ग में ज्यादा उत्साह देखा जा रहा है। मां जगदम्बा को बाजार से पंडाल स्थल तक लाने के लिए भक्त सुबह से ही मुख्यालय पहुंच गए थे। सुबह से भक्त बाजारों में दिखाई दिए। भक्तों के पहुंचने के बाद भी कई मूर्तिकार प्रतिमा को अंतिम रूप देते रहे। इस साल पहले से ही प्रतिमाओं की बुकिंग हो गई थी।

सुबहसे शाम तक चलता रहा सिलसिला

बुधवारीबाजार, पांडेपारा में शहर आसपास क्षेत्रों के मूर्तिकारों द्वारा बनाए गए प्रतिमाओं को ले जाने का कार्य भक्त शाम चार बजे तक करते रहे। शहर में सभी जगह मिट्टी से निर्मित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण किया गया था। बड़ी प्रतिमाओं को ले जाने के लिए ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ा। प्रतिमाएं ले जाने के दौरान भक्त जय माता दी के जयकारा लगा रहे थे।

जोत कलश प्रज्ज्वलित

शहरके शीतला मंदिर, चंडी मंदिर, मोखला मांझी मंदिर, महामाया, कपिलेश्वर मंदिर, दुर्गा मंदिर गंजपारा, ढाड़ महामाया, सिंचाई कालोनी के दुर्गा मंदिर, कपिलेश्वर मंदिर सहित अन्य मंदिरों में 51 से 501 की संख्या में ज्योति कलश की स्थापित किए गए। शीतला मंदिर में 201 ज्योति कलश स्थापित किए गए है। सभी जगहों पर दुर्गोत्सव के दौरान धार्मिक आयोजन एवं अनुष्ठान होंगे। शुरू दिन से ही माता सेवा से क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

आकर्षक सजाए गए पंडाल

शहरके सदर रोड, जवाहर पारा, आमापारा, गंगासागर तालाब, नयापारा, कुर्मी पारा, टिकरापारा, पांडेपारा, कुंदरूपारा, शिव