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जिले में 60 दिनों में 40 लोगों ने कीटनाशक दवाई खाई
फसल के लिए रखी गई कीटनाशक दवाई का दुरुपयोग।
भास्करन्यूज |बालोद
जिलेमें कीटनाशक दवाई खाकर आत्महत्या किया जा रहा है। कीटनाशक दवाई लोगों को सहज सरलता से मिल जाता है। इस वजह से लोग इसका उपयोग कथित तौर पर परेशान व्यक्ति अपनी जान लेने में कर रहे हैं। पिछले दो माह में लगभग 40 आत्महत्या के केस जिला अस्पताल में अाए हैं। जिनमें से 90 प्रतिशत केस में आत्महत्या के लिए कीटनाशक दवाई का उपयोग किया गया है।
फसल के लिए कीटनाशक दवाई का उपयोग होता है इसलिए यह किसान के घरों में आसानी से मिल जाते हैं। दवाई दुकान संचालकों के हर कीटनाशक दवाई नहीं देने के लिए कोई कड़े नियम नहीं है इसलिए जो इसे खरीदने आता है उसे बेच देते हैं। पिछले 10 दिनों से कीटनाशक दवाई खाकर आत्महत्या के मामले लगातार सामने रहे हैं।
तनावपारिवारिक कारण प्रमुख : क्षेत्रमें पिछले दो माह में जितने भी मामले आए हैं। हर मामले में पीड़ित व्यक्ति मानसिक तनाव पारिवारिक कारण को इसकी वजह बता रहे हैं। मरने की स्थिति में कारण स्पष्ट पता नहीं चल पाता पर कारण काफी पर्सनल होता है। जिसे समय रहते परिजन समझ नहीं पाते। भास्कर ने कुछ एक्सपर्ट से बात कर इन छोटी-छोटी बातों और बदलाव का पता लगाने की कोशिश की है।
स्कूलीबच्चे भी खा लेते हैं कीटनाशक दवाई
ग्रामसांकरा के 18 वर्षीय छात्र ने मंगलवार को कीटनाशक का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया। कन्नेवाड़ा हाईस्कूल कक्षा 12 वीं में अध्ययनरत है।
^ किसानों को चाहिए कि जहरीली दवाइयों का उपयोग वे तत्काल कर लें और घर में अनावश्यक रूप से रखें ताकि इसके दुरुपयोग की आशंका नहीं रहेगी। इन्हें पूरी निगरानी में रखें। नेमसिंहसाहू, अध्यक्ष, किसान संघ
^कीटनाशक दवाइयों का उपयोग खेती के लिए कर रहे या आत्महत्या के लिए यह हम कैसे बता सकते हैं। ज्यादातर लोग फसलों में कीटनाशक दवाई का उपयोग करने के लिए खरीदते हैं। जो खरीदने आते हैं उसे बेचते हैं। अटलदुबे, विक्रेता
^लोगों को जब आत्महत्या की सूझती है तो वे जो भी सामने होता है उसका उपयोग करते हैं। उन्हें घरों में कीटनाशक दवाई आसानी से मिल जाती है। एेसी दवाई छुपा कर रखें। डीपीठाकुर, एसडीओपी
कीटनाशक दवाइयों को छिपा कर रखने से नहीं होगा उसका दुरुपयोग
विशेषज्ञों की राय में आत्महत्या के क्या है कारण
पूर्व मेडिकल ऑफिसर डॉ. जयसिंह साहू का कहना है कि आत्महत्या करने के पीछे वह व्यक्ति दबाव में रहता है या अपने आप को ठगा सा महसूस करता है और ऐसी घटना को अंजाम देते हैं।
यह बातें ध्यान रखें-
1. जिंदगीअनमाेल है। मेरी जिंदगी में कुछ नहीं है, यह ख्याल हटा देना चाहिए।
2.कोईव्यक्ति बीमार होता है। बीमार व्यक्ति इलाज करवाता है। इसके बाद भी बीमारी ठीक नहीं हाेती है। ऐसे में व्यक्ति की धारणा हो जाती है कि अब वह बेकार हो गया है।
3.दूसरोंपर बोझ बन गया हूं, कई व्यक्ति यह सोचकर आत्महत्या करने का प्रयास करते है और नशे का सेवन ज्यादा करने लगता है। इसके बाद भी कुछ नहीं होता तो आत्महत्या कर लेते हैं।
बुधवार को सुबह 4.30 बजे करहीभदर निवासी 19 वर्षीय मोहित साहू ने चूहा मारने की दवाई खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया।
डिप्रेशन में जाना घातक
डॉ.आरडी दास का कहना है कि ज्यादातर मामलों में इस तरह की घटना छोटी-छोटी बातों पर घट जाती है। विवाद होने के बाद व्यक्ति अपने अाप को अकेला महसूस करने लगता है और आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाते हैं। कई मामलों डांट, फटकार के बाद भी व्यक्ति यह कदम उठाते हैं।
मानसिक दबाव अधिक
प्रोफेसरआरके जैन का कहना है कि आत्महत्या करने के पीछे मानसिक दबाव और पारिवारिक कारण ज्यादा होते हैं। ऐसी घटनाएं होने पर आमतौर पर परिजनों द्वारा कहा जाता है कि वह (आत्महत्या करने वाला) लंबे समय से डिप्रेशन में चल रहे थे, हम समझ नहीं पाए। कई मामलों में व्यक्ति परिजनों अपनी बात मनवाने आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाते हैं।
6 दिसंबर को ग्राम भेड़िया नवागांव निवासी 45 वर्षीय रघुवीर ठाकुर ने अपने घर में कीटनाशक दवाई खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की।
3 दिसंबर को को सुबह 8 बजे गोड़पार हर्राठेमा निवासी 58 वर्षीय घनाराम निषाद ने अज्ञात कारणों से कीटनाशक दवाई खा ली। इसे भी घर में दवाई मिल गई।
3 फरवरी को ग्राम निपानी में 19 वर्षीय युवती ने मंगलवार को शाम 7.30 बजे कीटनाशक दवाई खा ली जिसे दाखिल किया गया
4 फरवरी को सुबह 8 बजे ग्राम पोण्डी निवासी 23 वर्षीय दुलारी बाई पति दयानंद हल्बा ने पेट दर्द से परेशान होकर कीटनाशक दवाई खा ली।
7 फरवरी को रात 10 बजे पीपरछेड़ी निवासी 55 वर्षीय गौतम राम भुआर्य ने कीटनाशक खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। जिसे परिजनों की सूचना पर एंबुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल लाया गया।
9 फरवरी को ग्राम गुजरा खलारी निवासी 60 वर्षीय रमऊराम ने घरेलू झगड़ाें से परेशान होकर सुबह 8 बजे कीटनाशक खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। घर में उसे आसानी से दवाई मिल गई।
11 फरवरी को दोपहर 12.30 बजे शहर के गंजपारा निवासी 40 वर्षीय कीर्ति देशमुख ने कीटनाशक कर आत्महत्या करने का प्रयास किया। जिसे परिजनों की सूचना पर जिला अस्पताल लाया गया। दुर्ग रैफर किया गया।
10 फरवरी को जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर ग्राम जगन्नाथपुर में 50 वर्षीय सानूराम देशमुख ने कीटनाशक खा कर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने का कारण अब तक अज्ञात है।