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27 दिन से पढ़ाई ठप, 50 लाख रुपए कहां गए, किसी को मालूम नहीं

4 वर्ष पहले
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जिले में दिव्यांगों के एकमात्र आवासीय कचांदुर स्कूल को बंद होने से बचाने के लिए अब तक किसी तरह की पहल नहीं हो पाई है। पिछले हफ्ते मंगलवार को बच्चों, शाला प्रबंधन समिति, पालकों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत कराया था। प्रशासन ने पहल करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। बच्चों को डर है कि कहीं उनकी पढ़ाई ना छूट जाए। जो अब तक सीखा है, उसके आगे कुछ ना सीख पाए।

गौरतलब है कि इन दिव्यांग बच्चों को सामान्य स्कूल में पढ़ाया नहीं जा सकता। उन्हें पढ़ाने के लिए भी विशेष शिक्षकों व संसाधन की आवश्यकता होती है। इनके अभाव में इनका जीवन अशिक्षित ही गुजरता है। ऐसे दिव्यांग बच्चों को शिक्षित करने के लिए शासन ने आवासीय स्कूल शुरू किया था। अब शासन से ही फंड नहीं देने के चलते यह बंद हो चुका है। स्कूल में ताला लटका है। हालांकि सर्व शिक्षा अभियान के अधिकारी इस स्कूल को अपने रिकॉर्ड में खुला हुआ मान रहे हैं।

बालोद. गुंडरदेही जनपद शिलालेख।

भवन निर्माण के लिए हुआ था 50 लाख रुपए स्वीकृत
कलेक्टर ने कहा- हम फंड के लिए कर रहे प्रयास
कलेक्टर डॉ सारांश मित्तर ने कहा कि दिव्यांगों का ये स्कूल बंद ना हो, इसके लिए हम शासन से फंड की मांग कर रहे हैं। 50 लाख की राशि स्वीकृत होने के मामले की भी जांच कराई जाएगी। अफसरों ने मुझे कुछ नहीं बताया है।

राज्य संचालक को लिखा पत्र, कलेक्टर को सौंपी रिपोर्ट
सर्व शिक्षा अभियान के डीएमसी पीसी मर्कले ने कहा कि फंड के लिए राज्य संचालक को पत्र लिखा जा चुका है। कलेक्टर को भी प्रतिवेदन बनाकर दे दिया गया है। आगे क्या हुआ। 50 लाख की स्वीकृति के बारे में मुझे जानकारी नहीं है।

खनिज न्यास निधि से स्वीकृत हुआ था पैसा
यह 50 लाख रुपए की राशि खनिज न्यास निधि से स्वीकृत होने की बात तो कही जा रही है, लेकिन यह राशि शिलान्यास के बाद कहां गई किसी को मालूम नहीं है। पूर्व कलेक्टर का स्थानांतरण हो चुका है।

शाला प्रबंधन समिति पर ढाई लाख रु. का कर्ज
शासन स्कूल चलाने दो साल से फंड जारी नहीं कर रहा है। इससे स्कूल तो बंद हो ही गया है। वहीं उधारी में दो साल से संस्था चलाने वाले शाला प्रबंधन समिति ढाई लाख के कर्ज पर है। समिति के अध्यक्ष संतोष चंद्राकर ने बताया कि शासन से फंड आने के इंतजार में रह गए। बच्चों के राशन के लिए एक दुकान से उधारी में सामान लेते हैं। फंड आएगा यह सोचकर हम राशन खरीदते रहे। फंड नहीं आया और स्कूल बंद हो गया।

शिलालेख तीन महीने से जनपद में धूल खा रहा
एक अप्रैल को मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने नए कलेक्टोरेट के उद्‌घाटन के दौरान 50 लाख की लागत से कचांदुर आवासीय स्कूल के नए भवन के लिए शिलान्यास किया था। इसके लिए अफसरों ने शिलालेख भी तैयार किया था। शिलान्यास के बाद काम का कोई पता नहीं है। शिलालेख तीन महीने से गुंडरदेही जनपद पंचायत के स्टोर रूम में धूल खाता पड़ा हुआ है। पूर्व कलेक्टर ने नए भवन के लिए स्वीकृति दिलाई थी।

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