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नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों से विकास की आस लगा रहे ग्रामीण
जिलेके 18 वनांचल ग्राम को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जा चुका है। इसके बाद भी इन गांवों की स्थिति नहीं सुधरी है। जरूरी सुविधाओं के लिए यहां के ग्रामीण अब तक तरस रहे हैं। पिछले दिनों ग्रामीण मतदाताओं ने नए प्रतिनिधि का चयन किया है।
नए जनप्रतिनिधियों से ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि अब गांव का विकास होगा। वर्ष 2014 जनवरी में राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने के बाद ग्रामीणों काे लगा कि अब उन्हें जरूरी सुविधाएं मिलेगी लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है। नए जनप्रतिनिधियों के समक्ष ग्रामीणों की पुरानी मांग है। जिसे पूरा कराना चुनौती होगा। ग्रामीण अब भी पुराने मांग को दोहरा रहे हैं।
मुख्यमंत्रीने राजस्व ग्राम का दर्जा दिया : 20जनवरी 2014 को मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने जिला मुख्यालय के सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम में जिले के वनांचल ग्राम कोसमी, दुग्गाबाहरा, जगतरा, नगबेलडीह, पराकालकसा, वनपंडेल, मर्रामखेड़ा, आमाबाहरा, केशोपुर, रजोलीडीह, तालगांव, अमलीडीह, ओडेनाडीह, आमापानी सहित 18 गांवों के मुखियाओं को प्रमाण पत्र देकर राजस्व ग्राम का दर्जा दिया। राजस्व ग्राम का दर्जा पाने के बाद ग्रामीण उत्साहित हो उठे।
उन्हें लगा कि अब बहुत जल्द ही उनके गांव में पक्की सड़क बनेगी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री ने घोषणा के अनुरूप इन गांवों को राजस्व ग्राम की श्रेणी में शामिल तो कर लिया है लेकिन आज भी यहां के ग्रामीण विकास की बाट जोह रहा है।
जनपद पंचायत को प्रस्ताव भेजा गया है
जिनगांव को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया गया है। वहां के पूर्व प्रतिनिधियों के अनुसार ग्रामीणों की मांग के अनुरूप पंचायत से प्रस्ताव बनाकर जनपद पंचायत में दिए गए थे लेकिन विकास कार्य के लिए राशि स्वीकृत नहीं हुई। अब देखना है कि नए प्रतिनिधि विकास कार्य करा पाते है कि नहींω।
बालोद। वन से राजस्व ग्राम बनने के बाद भी वहां की सड़कें कच्ची है।