- Hindi News
- एक साल में जिले में एक हजार टीबी मरीज मिले
एक साल में जिले में एक हजार टीबी मरीज मिले
जिलेमें टीबी मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। विभाग द्वारा कई प्रयास किए जाने के बाद भी टीबी मरीजों की संख्या में कमी नहीं रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मरीजों की संख्या बढ़ने की प्रमुख वजह इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता का होना है।
विभागीय जानकारी अनुसार जिले में वर्ष 2014 में जनवरी से दिसंबर तक 1002 टीबी के मरीज मिले। सभी मरीजों का इलाज चल रहा है। आंकड़े से स्पष्ट हो रहा है कि जिले में टीबी के मरीज बढ़ते जा रहे है। वर्ष 2014 में जुलाई तक 584 मरीजों की पुष्टि की गई थी। यानि पांच माह में 420 मरीज और मिल गए।
2012में 233 और 2013 में 450 मरीज मिले : विभागीयजानकारी अनुसार वर्ष 2012 में टीबी मरीजों की संख्या 233 थी। वर्ष 2013 में 450 से अधिक मरीज जिले में मिले। विभाग द्वारा टीबी बीमारी के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सभी पंचायतों में इस बीमारी के जानकारी के लिए स्लोगन, बैनर, पोस्टर लगाई जा रही है। जागरूक कराने के लिए गांव में मितानिनों नर्सों को निर्देश दिया गया है। इसके बाद भी टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
जानिएटीबी रोग कैसे फैलता है : विशेषज्ञोंके अनुसार टीबी एक संक्रामक रोग है। यह बीमारी माइक्रो बैक्टीरिया ट्यूबरक्यूलोसिस नाम के जीवाणु से फैलता है। यह व्यक्ति के सीधे फेफड़ों पर असर करता है। बीमार व्यक्ति के खांसने से टीबी के जीवाणु हवा में फैलते हैं और स्वस्थ व्यक्ति के सांस द्वारा फेफड़े में चले जाते हैं। रक्त वाहिनी द्वारा यह कीटाणु शरीर के अन्य भाग में फैलकर आक्रमण करता है। इलाज नहीं कराने की स्थिति में धीरे-धीरे कीटाणु सभी अंगों में फैलता है। इसके बाद यह बीमारी ला इलाज हो जाती है।
70 प्रतिशत से ज्यादा केस
विभागीयजानकारी अनुसार यह बीमारी 70 प्रतिशत से ज्यादा केसेस में 15 से 45 वर्ष तक के व्यक्तियों में होता है। महिलाएं की अपेक्षा पुरुषों में यह बीमारी ज्यादा होते हैं। व्यक्ति खांसी आने के बाद गांव के झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराते हैं। इलाज कराने के बाद खांसी आना बंद हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति सोचता है कि अब वह ठीक हो गया।
बीमारी के ये हंै लक्षण
दोसप्ताह से खांसी आना, बुखार आना, भूख लगना, वजन का घटना, बलगम के साथ खून आना, रात में पसीना आना, छाती में दर्द, खंखारने पर खून निकलना आदि इस बीमारी के प्रमुख लक्षण है। इस तरह के लक्षण आने पर व्यक्ति गांव के डाक्टर द्वारा सामान्य गोली खाकर बीमारी को ठीक कर लेता है। लेकिन यह बीमारी कुछ दिन बाद फिर उभरकर सामने आने लगता है। टीबी को दूर करने के लिए सही गोली का उपयोग नहीं हो रहा।
^टीबी के मरीज बढ़ने की प्रमुख वजह लोगों में जागरूकता का नहीं होना है। खांसी आने पर व्यक्ति को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में बलगम की जांच करानी चाहिए। जांच के आधार पर दवाइयां दी जाएगी। इससे टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। विभाग द्वारा अभियान चलाकर टीबी की जानकारी दी जाती है। साथ ही पंचायतों मितानिनों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है।” डा.एनएल साहू, सीएमओ बालोद
बालोद| जिला असपताल में टीबी के मरीजों का इलाज चल रहा है।