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स्वाध्यायी छात्रों से वसूल रहे ज्यादा शुल्क

7 वर्ष पहले
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शासकीयमहाविद्यालय बसना पर अमहाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं को कालेज फीस के अतरिक्त जनभागीदारी शुल्क की दोहरी मार भारी पड़ रही है।

दिलचस्प तथ्य यह है कि प्रशासन अथवा विश्वविद्यालय के द्वारा जनभागीदारी शुल्क की राशि कितनी लेने चाहिए। यह तय नहीं किया है, बल्कि स्थानीय समिति के निर्णय को सर्वोपरि मानकर 400 रुपए की रसीद थमाकर पैसा लिया जा रहा है। वही इन अमहाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं में इस तरह जबरन जनभागीदारी शुल्क के रूप में राशि लेने से तीव्र आक्रोश व्याप्त है। विभागीय सूत्रों के अनुसार नियमित छात्र-छात्राओं को 50 फीसदी कालेज फीस पर छूट बीपीएल राशन कार्डधारियों को प्राप्त होती है एवं जनभागीदारी शुल्क के रूप मे कम राशि लिया जाता है। जबकि अमहाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं को कालेज शुल्क के साथ 400 रुपए जनभागीदारी शुल्क एवं अग्रेषण शुल्क के रूप में जमा करना पड़ रहा है।

अमहाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं से जनभागीदारी समिति के निर्णय की ढिढोरा पीटकर नियमित छात्र-छात्राओं से अधिक शुल्क लिया जा रहा है किंतु इन प्राईवेट छात्र-छात्राओं को इस राशि के बदले क्या-क्या सुविधा दिया जाता है। इस पर समिति एवं बसना कालेज प्रबंधन सही जबाब देने से कतराते नजर रहे है। सूत्रों के अनुसार अमहाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के द्वारा सिर्फ परीक्षा के तिथि में ही कालेज आते है। उन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं अन्य आयोजनों में भागीदारी देने की अनुमति प्रदाय नहीं किया जाता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि नियमित छात्र-छात्राओं से जनभागीदारी शुल्क अधिक लेने पर विवाद, आंदोलन इत्यादि होने के भय से समिति द्वारा इनका भार अमहाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं पर थोप दिया जाता है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ रणजीत कुमार पुरोहित का कहना है कि विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी बसना शासकीय महाविद्यालय में प्राईवेट परीक्षार्थीयों से जनभागीदारी शुल्क 400 रुपए लिया जा रहा है।