- Hindi News
- अबूझमाड़िया शिल्पियों का जादू विदेशों में भी
अबूझमाड़िया शिल्पियों का जादू विदेशों में भी
शिल्प ग्राम ने नक्सली पीड़ितों को काम के साथ दिया आसरा।
भास्करन्यूज | नारायणपुर
जिलेके अबूझमाड़ के झारावाही निवासी जनकाय उसेंडी जैसी शिल्पकारों ने रोजी-रोटी की समस्या बांस शिल्प से दूर कर ली।
बीके साहू की मानें तो बस्तर संभाग के अनेक शिल्पी स्विटजरलैंड, फ्रांस, इग्लैण्ड, इटली तथा अमेरिका जैसे देशों में अपनी कला-कृति प्रदर्शित कर चुके हैं और अब सारी दुनिया अबूझमाड़ के कलाकृति का लोहा मानने लगी है। कई सिद्धहस्त शिल्पियों ने पुरस्कृत होकर अपनी अलग पहचान स्थापित कर ली है। शिल्प ग्राम में रहकर अपनी कलाकृति तैयार करने वाली नक्सली पीड़ित उसेबेड़ा की सरपंच कोसीबाई और गारपा की दयनीबाई ने बताया कि सरकार ने हमें आसरा दिया।
कुंदला निवासी लखमी और कोहकामेटा की बुधनी ने बताया वे गांव के समय से ही बांस शिल्प में सिद्धहस्त थी। अब उन्हें मंत्री, अधिकारी सब नाम से जानते हैं और उनकी कला को सराहते हैं। अबूझमाड़िया महिलाओं से प्रोत्साहित होकर क्षेत्र के नक्सली पीड़ित बुके, गीता, मैनी आदि बीते डेढ़ माह पहले शिल्पग्राम में आकर शिल्प कला की बारीकियों को सीखने के साथ हुनरमंद बनने का प्रयास कर रही हैं, ताकि उनका आने वाला कल बेहतर और सुखद हो सके। संवेदनशील परिस्थिति को मद्देनजर रखते हुए नक्सली पीड़ितों को सीखने तथा समझने का अवसर मुहैय्या कराने प्राथमिकता दी जा रही है। शिल्पग्राम का पािरवारिक वातावरण इनके गुजरे हुए जख्मों में मल्हम लगा देता है।