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अबूझमाड़ में घुसे 3 हजार जवान, हफ्ते भर चला विशेष अभियान
{देश में नक्सलियों का सबसे बड़ा ठिकाना समझे जाने वाले अबूझमाड़ में पुलिस दीगर सुरक्षा बलों के 3 हजार जवान घुसे।
{दुगर्म पहाड़ियों और घने जंगलों में चला हफ्ते भर आपरेशन। नक्सलियों के स्थापना दिवस पर बड़े आयोजन की तैयारी धरी रह गई।
भास्करन्यूज . जगदलपुर
अबूझमाड़ में बीते 21 सितंबर को नक्सलियों के 10 वें स्थापना दिवस के मौके पर विशालआयोजन और बड़े लीडरों के पहुंचने की खबर पर पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा, एसटीएफ ने सीमावर्ती महाराष्ट्र की पुलिस के सहयोग से अबूझमाड़ में 20 सितंबर से हफ्ते भर तक चलाया विशेष अभियान।
बस्तर रेंज के आईजी एसआरपी कल्लूरी ने शनिवार की शाम पत्रवार्ता में यह जानकारी देते हुए बताया कि ऐहतियात के तौर पर अभियान पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था। जवानों के सुरक्षित लौटने के बाद ही इसकी जानकारी दी जा रही है। पूरी मुहिम के दौरान नक्सलियों से कई जगहों पर छिटपुट मुठभेड़ हुई। पूरे अभियान के दौरान केवल एक असिसटेंट कमांडेंट ही घायल हुए। नक्सली अपने ही मांद में कहीं पुरजोर हमला नहीं कर सके।
कुतूल नक्सलियों की राजधानी : अबूझमाड़ के कुतूल में पहुंची सुरक्षा बलों की टुकड़ी को ग्रामीणों ने बताया कि इस इलाके को नक्सली अपनी राजधानी घोषित कर रखे हैं। कुतूलू हमारी राजधानी है ऐसे नारे स्कूली छात्रों से लगवाए जाते हैं। कुतूल आश्रम शाला में बच्चों की तादाद बढ़ी है। जो यह दर्शाती है कि लोग नक्सलियों से अलग रखने अपनी मर्जी से बच्चों को आश्रम में भेज रहे हैं। अबूझमाड़ के लोग भी अब मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं। यही वजह है कि यहां लोग सुरक्षा बलों से इलाके में सड़क पुल की मांग कर रहे थे।
एलमागुड़ा में नक्सली आयोजन : अबुझमाड़ में भारी तादाद में सुरक्षा बलों के घुसने पर नक्सली तयशुदा जगह पर स्थापना दिवस का आयोजन नहीं कर सके। रस्मअदायगी के तौर पर सुकमा जिले के दूरदराज के इलाके एलमागुड़ा में नक्सलियों ने आनन-फानन में स्थापना दिवस मनाया। जिसमें 200 नक्सली नेता समेत करीब 2000 ग्रामीण पहुंचे थे। इस बात की सूचना देर से मिलने और बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर होने की वजह से पुलिस समय पर मौके तक नहीं पहुंच पाई।
पत्रकारांे से चर्चा करते आईजी एसआरपी कल्लूरी।
पहली लड़ाई जीत ली
आईजीकल्लूरी ने बताया कि बीते 4 माह में 180 नक्सलियों ने आत्मसमपर्ण किया है। जिसके चलते इनका संगठन काफी हद तक कमज