इंद्रावती नदी के उजाड़ तटों पर अब लहलहा रहे खेत
खेतिहर जमीन के साथ ही अब इंद्रावती नदी के तट पर हर तरफ हरियाली की चादर बिखरी पड़ी है। कहीं पर खेतों सब्जी ही सब्जी लगी तो कहीं पर मक्के के खेत लहलहा रहे हैं। सूूरजमुखी और मिर्च की खेती भी हो रही है।
खेती के प्रति आई जागरुकता के चलते जिले के किसान अब सिंचाई संसाधन की कमी के चलते नदी के किनारे खेती को लेकर संजीदा हो गए हैं। आसानी से सिंचाई सुविधा मिलने के चलते यहां पर हर सीजन में फसल ली जा रही है।
पिछले साल करीब दो एकड़ में तरबूज की खेती करने वाले बड़े चकवा के किसान जयमन को राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त होने के बाद इस गांव के साथ ही अन्य ब्लाकों में इंद्रावती नदी के किनारे खेती करने वाले किसानों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सबसे अधिक खेती बस्तर ग्राम के बाकेल, बड़ेचकवा , नारायणपाल, जगदलपुर ब्लाक के करीतगांव मालगांव व बकावंड ब्लाक के आधा दर्जन गांवाें में की जा रही है। कैश क्रैश क्राप होने के चलते अधिकतर किसान सब्जियों की खेती ज्यादा कर रहे हैं। जिसका फायदा उन्हें बड़े पैमाने पर मिल रहा है।
शाकंभरी योजना का मिल रहा है फायदा
150 से बढ़कर 500 हेक्टेयर हुआ रकबा
नदी किनारे खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है जो 3 साल पहले तक 150 हेक्टेयर से 500 हेक्टेयर तक बढ़ गया है। सबसे अधिक खेती जगदलपुर और बस्तर ब्लाक में हो रही है। कृषि वैज्ञानिक आदिकांत प्रधान ने कहा कि शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र भी नदी किनारे खेती करने वाले किसानों को कोचई एवं बंडा की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।अब तक करीब दाे दर्जन किसानों को मुफ्त में बीज व बंडा दिया गया था। जिसका फायदा किसानों को बड़े पैमाने पर हुआ है। नुकसान से बचने कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को सलाह दे रहे हैं।
क्या कहते हैं किसान
बस्तर ब्लाक के किसान दशमू ने इस साल नदी किनारे 12 एकड़ में सूरजमुखी, सब्जी व अन्य फसलों की खेती की है। फसल अच्छी होने से उत्पादन अनुमान के मुताबिक होने की संभावना है। उन्होने कहा कि सिंचाई सुविधा आसानी से मिलने वे हर साल खेती का रकबा बढ़ा रहे हैं।
बड़ेचकवा के गिरधर ने कहा कि पानी की सुविधा नदी से मिलने के चलते उन्होने इस साल पांच एकड़ में मिर्च की खेती की है। अब तक मिर्च में कोई रोग नहीं लगा है। आने वाले दिनो में वे अन्य फसलो की खेती कर रहे हैं। खेती करने की प्रेरणा उन्हें राज्यपाल पुरस्कार से नवाजे गए जयमन से मिली है।
बाकेल के किसान समूद राम, रामदास व अन्य किसानों ने बताया कि मक्के की खेती में हो रहे फायदे को देखते हुए एक दर्जन से अधिक किसानों ने 100 एकड़ से ज्यादा रकबे में नदी किनारे मक्के की खेती की है।
नदी किनारे खेती को लेकर किसान जागरूक हो गए हैं। वे हर सीजन में खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। इस काम में शाकंभरी योजना के तहत दिए गए पंप कारगर साबित हो रहे हैं। आने वाले दिनों में यह रकबा और अधिक बढ़े इसके लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। कैश क्राप के चलते अधिकतर इस समय सब्जी व मक्के की खेती यहां पर ज्यादा कर रहे हैं। कपिल देव दीपक, उपसंचालक कृषि
जगदलपुर। इंद्रावती नदी के किनारे बाकेल में 100 एकड़ से अधिक रकबे में लगी मक्के की फसल का निरीक्षण करते उपसंचालक कृषि।