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बस्तर में नक्सली खौफ, ठेकेदार डरे 17 अस्पतालों का निर्माण अटका

7 वर्ष पहले
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प्रदेशमें 20 करोड़ की लागत से बनने वाले 65 अस्पतालों का निर्माण पिछले तीन साल से अटका हुआ है। बार-बार टेंडर मंगाने के बाद भी ठेकेदार इसमें रूचि नहीं ले रहे हैं। नतीजतन कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जर्जर किराए के भवनों में चल रहे हैं। रूके हुए अस्पतालों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल है। बस्तर संभाग में ही 17 स्वास्थ्य उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण अधर में है। यहां प्रमुख कारण नक्सलियों का खौफ बताया जा रहा है। इससे कारण ठेकेदार सामने नहीं रहे है। वहीं, प्रदेश के दूसरे हिस्सों में टेंडर पुराने रेट के हिसाब से जारी होना भी अहम वजह मानी जा रही है।

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है। इसके पीछे डॉक्टरों के साथ अस्पताल बिल्डिंग का नहीं होना बड़ा कारण है। अस्पतालों के निर्माण के लिए स्वास्थ्य संचालनालय बार-बार टेंडर जारी कर हलाकान हो गया, लेकिन कोई भी ठेकेदार बिल्डिंग बनाने के लिए सामने नहीं आया। अब सीजीएमएससी (छग मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड) ने सभी अस्पतालों के लिए टेंडर मंगाया है। अटके हुए अस्पतालों में सीएचसी, पीएचसी आयुर्वेद अस्पताल शामिल हैं।

गैर नक्सली क्षेत्रों का भी बुरा हाल

नक्सलीक्षेत्रों में जहां अस्पताल नहीं बन रहे हैं, वहीं गैर नक्सली क्षेत्रों का भी बुरा हाल है। कोरिया जिले में ही शेरी, मैनपुर, कोइलारा, जयथान, उज्ञाव, आनंदपुर में एक करोड़ 32 हजार की लागत से बनने वाले उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसके लिए छह-छह बार टेंडर मंगाए जा चुके हैं। प्रत्येक अस्पताल की लागत 22 लाख रुपए है। रायपुर जिले में नगरगांव, अकोली, अछोली, बलौदाबाजार जिले के तेलासी, सिरियाडीह में पीएचसी का निर्माण नहीं हुआ है।

ये है स्थिति

छगमें कुल अस्पताल

जिला अस्पताल- 27

सीएचसी- 147

पीएचसी- 725

बिल्डिंग निर्माण अटका- 65 अस्पतालों का

कुल लागत- 20 करोड़

^जहां भी अस्पताल बिल्डिंग का निर्माण अटका है, वहां के लिए फिर से टेंडर मंगाए गए हैं। हमारी कोशिश स्वयं की बिल्डिंग में अस्पताल संचालित करना है। उम्मीद है कि अस्पताल बन जाएंगे। डॉ.कमलप्रीत सिंह, संचालकस्वास्थ्य सेवाएं

बनने है करीब दो दर्जन अस्पताल

बस्तरमें अस्पताल नहीं बनने का कारण नक्सलियों की धमकी को माना जा रहा है। अधिकारी भी स्वीकारते हैं कि ठे