61 स्कूलों में किसी ने नहीं लिया प्रवेश
बस्तर जिले में 127 प्राइवेट स्कूल, 66 में ही तैयार हुए गरीब तबके के बच्चे पढ़ाई के लिए। देहात के स्कूलों को नहीं दी तरजीह।
भास्करन्यूज | जगदलपुर
एकतिहाई से ज्यादा शिक्षा सत्र गुजर जाने के बाद जिले भर के प्राइवेट स्कूलों ने नि:शुल्क शिक्षा लेने वालों की सूची शिक्षा विभाग को दी है। 2014-15 के सत्र के लिए नर्सरी में 899 और पहली कक्षा में 627 छात्र-छात्राओं को महंगे प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन दिलवाई जा सकी है। आश्चर्य की बात यह है कि गरीब तबके के बच्चों ने देहात के प्राइवेट बड़े स्कूलों में पढ़ने की कोई रुचि नहीं दिखाई है। वहीं शहरी क्षेत्रों की निजी शालाओं में शत-प्रतिशत दाखिले हुए हैं।
हालांकि यहां भी पालकों ने 15-20 बड़ी नामी-गिरामी संस्थाओं में बच्चों को पढ़ाने की प्राथमिकता तय की है। स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि जिले के आधे प्राइवेट स्कूलों में भी रुझान कम है। हालांकि इस साल शिक्षा विभाग के अफसरों ने एक हजार ऐसे छात्रों को प्रवेश दिलवाने का टारगेट रखा था, जो 1526 तक पहुंच गया है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी बृजेश कुमार बाजपेई ने बताया कि पालकों के आवेदन के आधार पर जितना संभव हुआ उन्हीं स्कूलों में बच्चों के दाखिले करवाए हैं। प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि इन बच्चों की पढ़ाई नियमित रहनी चाहिए।
3 साल में पढ़ सके 874 बच्चे
{नि:शुल्क शिक्षा के अधिकार को लेकर बस्तर में जागरुकता की बेहद कमी है। शहरी क्षेत्रों में लोगों को इसकी थोड़ी बहुत जानकारी है जबकि अर्द्धशहरी और देहात इलाकों में इसका पता नहीं है।
{ सत्र 2011-12 के बाद गुजरे सत्र 2013-14 तक तीन साल गुजर चुके हैं, लेकिन इस दौरान पूरे जिले में गरीब तबके के सिर्फ 574 लड़के-लड़कियों को ही फायदा मिल सका है।
{ प्रचार-प्रसार के हिसाब से यदि देखा जाए तो 2014-15 की शुरुआत में शिक्षा मेला हर ब्लाक में लगाया गया। जबकि पिछले सालों में इस दिशा में काफी उदासीनता रही। जिसका फायदा बच्चों को नहीं मिल सका।
{ शहरी और खास तौर पर चुनिंदा स्कूलों में एडमिशन के रुझान से साफ होता है कि जहां पढ़ाई का स्तर ठीक है पालक उन्हीं संस्थाओं को तरजीह दे रहे हैं। जबकि हर गली-मुहल्ले में अब स्कूल खुले हुए हैं।