समितियों के कृषि यंत्रों का पता नहीं
सोसायटियों के माध्यम से किसानों को राहत देने जिला सहकारी बैंक की कोशिश अब तक नहीं हो पाई कारगर। किसानों की जेबें हो रही ढीली।
भास्करन्यूज | जगदलपुर
किसानोंको राहत देने के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने सोसायटियों के जरिए किसानों को किराए पर सस्ते उपकरण देकर राहत पहुंचाने की बात कही थी। योजना के दो साल गुजरने के बाद भी बैंक इसको लेकर गंभीर नहीं हो पाया है। इस योजना के संचालन के लिए समय पर पैसे नहीं मिलने तो कभी अन्य कारण बता लेटलतीफी हो रही है। जिसका खामियाजा इस समय बस्तर जिले के 60 हजार से अधिक कृषक परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
सालों बाद भी किसान खेत की जुताई से लेकर अन्य कृषि कार्य करने के लिए अब भी बड़े किसानों पर ही निर्भर हैं। बड़े किसान भी छोटे किसानों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनसे अनाप-शनाप रेट ले रहे हैं। नतीजतन छोटे किसानों को कृषि की बढ़ती हुई लागत से परेशान होना पड़ रहा है।
लाभ िमल पाया कुछ ही किसानों को
कृषिविभाग की कृषि यंत्र सेवा केंद्र का लाभ केवल कुछ किसानों तक ही सीमित होकर रह गया है। कृषि अभियांत्रिकी विभाग से मिली जानकारी मुताबिक 50 फीसदी अनुदान पर मिलने वाले कृषि यंत्र सेवा का लाभ कुछ किसानों ने तो ले लिया है, लेकिन वे इसकी शर्तों का पालन नहीं कर रहे है। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। ज्ञात हो जिले में खरीफ के सीजन में एक लाख 90 हजार रबी के सीजन में करीब 85 हजार हेक्टेयर में खेती होती है।
^बस्तर जिले में शुरू नहीं हो सकी है। प्राथमिकता के तौर पर इसे पहले चरण में केवल दंतेवाड़ा जिले के 18 समितियों में शुरू किया गया है। जैसे -जैसे नाबार्ड से इस योजना के लिए पैसा मिलता जाएगा वैसे ही इसका विस्तार भी होगा।”
डीसीठाकरे, सहकारीकेंद्रीय बैंक सीईओ
50 फीसदी अनुदान की योजना थी बैंक की
नाबार्डके सहयोग से संचालित इस योजना में एक बहुउद्देशीय सेवा केंद्र बनाने की बात कही गई है। इसके लिए सोसायटी को 15 लाख रुपए दिए जाएंगे। इसमें 7 लाख 40 हजार रुपए का अनुदान राज्य सरकार देगी और शेष राशि सोसायटी को 7 साल के अंदर जमा करना होगा। इस राशि से समिति दो ट्रैक्टर और कुछ कृषि यंत्र खरीद कर किसानों को कम दाम पर किराए पर देगी। इस योजना में सोसायटी जो भी कृषि यंत्र की खरीदारी करेगी वह तीन साल तक नहीं बेच पाएगी।