सामाजिक कुरीतियां

5 वर्ष पहले
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सीएम और मंत्री कुरीतियों को मानते हैं अभिशाप कहा-कानून बनाएंगे, लोगों को करेंगे जागरूक
लोगों को शिक्षित करना होगा
इन सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का ठोस उपाय यही हो सकता है कि लोगों को शिक्षित किया जाए। उन्हें इन कुरीतियों के खिलाफ जागरूक किया जाए। सरकार समय-समय पर जागरुकता अभियान चलाती रहती है। बृजमोहन अग्रवाल, मंत्री, कृषि, सिंचाई, धर्मस्व

गांवों में लोगों का मन बदलना आसान नहीं
बाल विवाह रोकने के लिए हमारा विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जहां भी बाल विवाह की सूचना मिली, कार्रवाई की गई। शहर से यह प्रथा खत्म हो गई है। गांवों में है। वहां मन बदलना इतना आसान नहीं है, उन्हें जागरूक बनाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। महिलाओं को लेकर छत्तीसगढ़ में अच्छा माहौल है, फिर भी जो घटनाएं होती हैं तो उसे रोका जा रहा है।\\\'\\\' रमशीला साहू, मंत्री, महिला एवं बाल विकास

कुरीतियों पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रयास
ये कुरीतियां प्रदेश के लिए समस्या हैं। रुढ़िवादिता व अंधविश्वास के भी मामले सामने आते हैं। सरकार इनके उन्मूलन के लिए हमेशा प्रयासरत रही है। हम विभिन्न कार्यक्रमों व सेमिनार के माध्यम से लोगों को जागरूक करते हैं। पुलिस भी कार्रवाई करती है ताकि लोग अंधविश्वास व रुढ़िवादी परंपराओं से दूर रहें। हम इन पर पूरी तरह से रोक लगाने का प्रयास करेंगे। इसके लिए सभी तरह के कानूनी पहलुओं पर विचार करेंगे।\\\'\\\' डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़

मैं खुद प्रभावित परिवारों से मिलने उनके गांव जाऊंगा
कुरीतियों को लेकर भास्कर ने जो खबरें प्रकाशित की हैं, मैं स्वयं वहां जाऊंगा। कुरीतियों को दूर करने के तीन उपाय हैं - शिक्षा, जागरुकता और स्वावलंबन। महिलाओं को इतना आत्मनिर्भर बना दिया जाए कि उन्हें किसी की मदद की जरूरत न पड़े। इससे सकारात्मक नतीजे आएंगे। शिक्षा की बात है तो आज ही कुरूद के छात्र ने दसवीं बोर्ड में टॉप किया है।\\\'\\\' अजय चंद्राकर, मंत्री, पंचायत और स्वास्थ्य शेष|पेज 7





सरकार और पुलिस काम कर रही है :

इस तरह की कुरीतियां समय-समय पर सामने आती हैं। सरकार भी इनकी रोकथाम के लिए प्रयास करती है। पुलिस भी सक्रिय है। इन कुरीतियों को राेकने के लिए पुलिस अपना काम करेगी।

पुन्नूलाल मोहले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री





यह समस्या न के बराबर रह गई है :

बाल विवाह प्रथा अब छत्तीसगढ़ में न के बराबर रह गई है। इसकी कोई शिकायत भी नहीं आती। मैं जनसंपर्क के दौरान खुद लोगों को समझाता हूं कि बाल विवाह या गर्भ में ही विवाह गलत है। इनके रोकथाम के लिए कानून भी है जहां सूचना मिलती है कार्रवाई होती है। किसी का गांव या समाज से बहिष्कार करना सामाजिक कुरीति है। इसे समाज या गांव के लोगों को समझाकर ही दूर किया जा सकता है। महिलाओं का सम्मान छत्तीसगढ़ की संस्कृति का हिस्सा है।

भैयालाल राजवाड़े, खेल मंत्री

दूसरे विभाग का मामला है :

ये मामले पूरी तरह महिला एवं बाल विकास विभाग तथा समाज कल्याण से जुड़े हैं। वह ही इसके लिए नीति बनाता और पालन करता है। बेहतर होगा कि उनसे ही राय या उपाय पूछे जाएं।

अमर अग्रवाल, मंत्री, नगरीय प्रशासन



कहीं बाल विवाह नहीं हो रहा:

प्रदेश में कहीं भी महिलाओं के साथ किसी भी तरह के भेदभाव जैसी स्थिति नहीं है। मेरी जानकारी में यह भी नहीं है कि कहीं बाल विवाह हो रहे हैं। सभी लोग तय उम्र 18 साल के बाद ही शादी करते हैं। आप जो कह रहे हैं ऐसा कुछ नहीं है।

दयालदास बघेल, मंत्री, संस्कृति

इन्हें कलंक कहना ठीक नहीं :

कुरीतियों को रोकने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। हमारी ही सरकार ने टोनही जैसी कुरीति रोकने कड़े कानून बनाए हैं। बाल विवाह पर भी कड़ी कार्रवाई की जाती है। कुछ आदिवासी परंपराओं को जन जागरुकता के जरिए खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। इन्हें कलंक कहना ठीक नहीं है।

रामसेवक पैकरा, गृहमंत्री

रुढ़िवादी इन परंपराओं को मान रहे हैं

कुरीतियों पर चलना एक घृणित काम है। बस्तर में कई सामाजिक संगठन इन्हें खत्म करने में लगे हुए हैं। पढ़े-लिखे लोगों ने मानसिकता बदली है, केवल कुछ पुराने रुढ़िवादी ही इन परंपराओं को मानते हैं। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए कानून बने हैं पर परंपरा के नाम पर होने वाली इन कुरीतियाें को जागरुकता से ही रोक पाएंगे।

महेश गागड़ा, मंत्री, वन

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