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बस्तरिया को ही मिलेगी नौकरी, संशय कायम

7 वर्ष पहले
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सामान्य प्रशासन विभाग ने भेजा पत्र। पांचवीं अनुसूची के हिसाब से नौकरी देने के निर्देश। कुलपति कुलसचिव ने मांगा था मार्गदर्शन। भास्कर ने अगस्त में चलाया था बस्तरिया को मिले नौकरी अभियान।

भास्करन्यूज . जगदलपुर।

बस्तर यूनिवर्सिटी में चतुर्थ वर्ग के रिक्त पड़े सौ पदों पर अब स्थानीय बस्तरिया युवकों को ही नौकरी मिलेगी। पिछले दो सालों से बीयू प्रबंधन ने इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को बस्तरिया गैर बस्तरिया किसे नौकरी दी जाए इस बात पर असमंजस होने की बात कहते हुए पूरी प्रक्रिया को लटका दिया था।

इसके बाद दैनिक भास्कर ने अगस्त में बस्तरिया को मिले नौकरी अभियान की शुरूआत की और लगातार इस संबंध में खबर प्रकाशित की। इस दैारान भास्कर ने स्थानीय विधायक, सांसद, मंत्री से लेकर सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों तक बस्तरिया को नियमों के हिसाब से नौकरी देने की बात पहुंचाई।

भास्कर ने ही सबसे पहले इस बात का खुलासा किया था कि बस्तर की यूनिवर्सिटी में बस्तर के बेरोजगारों ही नौकरी नहीं दी जा रही है। इसके बाद भास्कर ने ही खुलासा किया था कि किस तरह से दो सालों से बस्तर के बेरोजगारों से नौकरी के नाम पर मंगाए गए आवेदन फार्म की राशि का ब्याज बीयू के खाते में जमा हो रहा है। लगातार खबरों के प्रकाशन के बाद स्थानीय बीयू प्रबंधन भी जागा और उसने इस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग से राय मांगी।

एक माह के अंदर ही सामान्य प्रशासन विभाग ने कुलपति को पत्र लिखकर साफ कर दिया की चतुर्थ वर्ग की श्रेणी में स्थानीय बस्तरिया युवकों को ही नौकरी दी जाए और इस दौरान पांचवीं अनुसूची के निर्देशों का विशेष ख्याल रखा जाए। इस आशय का एक पत्र कुलपति और कुलसचिव के पास भी पहुंचा है। भास्कर की मुहिम एक बार फिर से रंग लाई और बस्तर के बेरोजगारों के हित में चलाई गई मुहिम का सार्थक परिणाम निकला।

कुलसचिव इंदु अनंत ने बताया कि शासन से एक पत्र विश्वविद्यालय को प्राप्त हुआ है जिसमें नियमों के अनुसार रिक्त पदों पर भर्ती करने की बात कही गई है।

राज्य स्तर की संस्था है बीयू

मामलेपर चर्चा करते हुए बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति एनडीआर चंद्रा ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग से एक पत्र मिला है, इस पत्र में नियमों के अनुसार रिक्त पड़े पदों पर भर्तियां करने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि राज्य पत्र में उल्लेख है कि किसी