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नक्सलियों ने दी कीमत चुकाने की चेतावनी

7 वर्ष पहले
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नक्सलियों के सम्मेलन में आंध्रा और ओडिशा के बड़े लीडर हुए शामिल। कहा सरकार अपनी शर्तों से पलट गई, बंदी सहानुभूति सप्ताह का कर रहे आयोजन।

भास्करन्यूज | जगदलपुर/मलकानगिरी

बस्तरसे लगे ओडिशा के जंगलों में आंध्रप्रदेश और ओडिशा में सक्रिय नक्सलियों ने राजनैतिक बंदी सहानुभूति सप्ताह मनाते हुए जगह-जगह सभाएं ली और सरकार पर अपनी शर्तों से मुकर जाने का आरोप लगाया। नक्सली संगठन कोरकुंडा आंध्रा दलम के नेता विजयलक्ष्मी ने हजारों आदिवासी ग्रामीणों की मौजूदगी में कहा कि ओडिशा के मलकानगिरी, कोरापुट, गजपति और रायगढ़ा आदि जिलों में सौ से ज्यादा निर्दोष आदिवासियों को नक्सली बताते हुए झूठे मामले में फंसा कर जेल भेज दिया गया है। नक्सली संगठन की ओर से इन पीड़ित परिवारों से हमदर्दी जताते हुए चावल-दाल दिए गए साथ ही इन्हें खेती करने लायक जमीन देने की बात कही गई है।

नक्सली नेता के अनुसार अकेले मलकानगिरी जेल में ही 63 निरीह आदिवासियों को बंद कर रखा गया है। इसके अलावा कोरापुट, गंजाम और विशाखापटनम में सैकड़ों आदिवासियों को रखा गया है। नक्सल प्रभावित इलाकों में 13 से 19 सितंबर तक चलने वाले सहानुभूति सप्ताह के दौरान नाच-गाना के माध्यम से ग्रामीणों को अपने नीतियों की जानकारी दी गई। इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन ओडिशा, आंध्र और छत्तीसगढ़ के अंचलों में करने की बात कही गई है। नक्सलियों का यह एक बड़ा सम्मेलन था जो चित्रकोंडा अंचल के रालेगुड़ा के जंगलों में आयोजित किया गया था। इसके लिए कुछ पत्रकारों को विशेष तौर पर बुलाया गया था। जिन्हें ओड़िशा से आंध्रप्रदेश के रास्ते फिर से ओडिशा के इन जंगलों में ले जाया गया। पहाड़ पर नहीं चढ़ पाने की दशा में कुछ स्थानों पर पत्रकारों को घोड़े की सवारी भी करवाई गई। आंध्रप्रदेश के शीर्ष नक्सली लीडरों की मौजूदगी में आयोजित यह सम्मेलन भी आंध्रप्रदेश के नक्सली नेताओं की अगुवाई में आयोजित किया गया था।

ओडिशा और आंध्रा की सीमा पर है रालेगुड़ा

मलकानगिरीजिले के चित्रकोंडा में आंध्रप्रदेश से लगे रालेगुड़ा जंगल में बसे 25 से 30 गांव के एक हजार से ज्यादा ग्रामीणों ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया है। यह इलाका आंध्रप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है। ओडिशा के आखिरी छोर पर स्थित यह इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है। सीमावर्ती क्षेत्र होने से यहां नक्सली गतिविधि निर्बाध तौर पर चल