- Hindi News
- 10 हजार क्विंटल की मात्रा फिर बढ़ी संग्रहण केंद्रों में धान की
10 हजार क्विंटल की मात्रा फिर बढ़ी संग्रहण केंद्रों में धान की
58 खरीदी केंद्रों से धान का उठाव सुचारू रूप से नहीं होने के चलते संग्रहण केंद में भंडारण की मात्रा बढ़ाई शासन ने।
भास्करन्यूज | जगदलपुर
कस्टममिलिंग में मिलर्स की लापरवाही के का खामियाजा मार्कफेड को भुगतना पड़ रहा है। संग्रहण केंद्र में धान सुरक्षित रखने के लिए मार्कफेड को अब दुबारा नए सिरे से तैयारी करनी पड़ रही है।
डीएमओ एलआर साहू ने बताया कि संग्रहण केंद्र में कुछ दिनों पूर्व तक 2 लाख 14 हजार क्विंटल धान का भंडारण का लक्ष्य दिया था। जिसे अब बढ़ाकर सवा दो लाख क्विंटल कर दिया गया है। मतलब यहां 10 हजार क्विंटल धान के भंडारण के लिए फिर से इंतजाम करने पड़ेंगे। जिसको लेकर संग्रहण केंद्र के प्रभारी को निर्देश दे दिया गया है।
डीएमओ ने बताया कि पिछले साल भी शासन ने बस्तर जिले के बिरिंगपाल संग्रहण केंद्र में बस्तर बीजापुर जिले का 2 लाख 48 हजार 860 क्विंटल धान इस संग्रहण केंद्र में रखवाया था, लेकिन इस साल केवल बस्तर जिले का सवा दो लाख क्विंटल धान संग्रहित करवाया जा रहा है।
यह स्थिति तब है जब जिले में इस साल धान की खरीदी साढ़े 8 लाख क्विंटल की गई है जो पिछले साल से करीब तीन लाख क्विंटल कम है। ज्ञात हो कि संग्रहण केंद्र में धान का भंडारण केवल एक ट्रांसपोर्टर्स के द्वारा किया जा रहा है। कस्टम मिलिंग के नए नियमों ने मिलर्स की परेशानी बढ़ा दी है। अग्रिम में चावल जमा करने और बैंक गारंटी देने पर ही खरीदी केंद्रों से धान का उठाव करने की शर्त के चलते कई मिलर्स निर्धारित कोटे के हिसाब से चावल जमा नहीं कर पा रह हैं। जिसके चलते खरीदी केंद्रों से उठाव में कमी हो रही है। खाद्य विभाग और मार्कफेड से मिली जानकारी के मुताबिक खरीदी खत्म हुए 9 दिन गुजर चुके हैं। बावजूद इसके मिलर्स ने अब तक करीब 32 हजार मीट्रिक टन का उठाव ही कर पाए हैं।
डीएमओ ने बताया कि खरीदी केंद्रों से धान के उठाव को लेकर मिलर्स पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। जिसका असर एक हफ्ते के अंदर दिखाई देने लगेगा।
^संग्रहण केंद्र में धान के भंडारण का आदेश शासन से मार्कफेड को दिया गया है। मिलर्स धान का उठाव सुचारू रूप से कर रहे हैं। धान का उठाव सुचारू रूप से नहीं होने के चलते किसी खरीदी केंद्र में धान को नुकसान होने की जानकारी नहीं मिली है। इस महीने के अंत तक खरीदी केंद्रों से धान का उठाव पूरा होने की संभावना है।” विश्वनाथनेताम, खाद्य नियंत्रक
सूखती से बढ़ सकती है परेशानी
खरीदीकेंद्रों संग्रहण केंद्र से धान का उठाव सुचारू रूप से नहीं हाेने से गत वर्ष धान के तौल में 180 क्विंटल वजन कम पाया गया था। जिसको लेकर मार्कफेड को परेशानी उठानी पड़ी थी। बावजूद इसके मिलर्स और परिवहनकर्ता धान के उठाव को लेकर गंभीर नहीं है। जिसके चलते इस साल सूखती की मात्रा बढ़ने की बात समिति संचालकों के द्वारा कही जा रही है। गौरतलब है कि कई केंद्रों में चूहों के चलते धान के बड़े पैमाने पर नुकसान होने की बात कही जा रही है।