पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बस्तर में बायोगैस संयंत्र लगाने पिछड़ गया क्रेडा

बस्तर में बायोगैस संयंत्र लगाने पिछड़ गया क्रेडा

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सस्ते प्रदूषण रहित ईंधन का विकल्प होने के बाद भी जिले में बायो गैस प्लांट लगाने में क्रेडा को आनुपातिक सफलता नहीं मिल रही है।

भास्करन्यूज | जगदलपुर

योजनाकी जानकारी और पशुओं की कमी के चलते सैकड़ों परिवार इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं वहीं कई लोग जिनके पास संसाधन मौजूद हैं उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन क्रेडा विभाग लक्ष्य से काफी दूर है। साल दर साल लक्ष्य के पूरा नहीं होने को लेकर जब अधिकारियों से चर्चा की गई तो उन्होंने हितग्राहियों की लापरवाही के साथ ही पशुओं की कमी को कारण बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते रहे है। गौरतलब है कि बायोगैस संयत्र के जरिए शासन वनों को बचाने के साथ लकड़ी से निकलने वाली विषैली गैस से निजात दिलाना था।

शासन ने वर्ष 2014-15 में क्रेडा को सात ब्लाकों में 75 हितग्राहियों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य दिया था। वित्तीय वर्ष के 10 महीने से अधिक गुजरने के बाद विभाग ने 50 से भी कम हितग्राहियों को इस योजना से जोड़ने में सफल रहा है। इसके अलावा वर्ष 2013-14 में 75 परिवारों का टार्गेट तय किया गया था। जिसमें विभाग ने केवल 50 हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया था। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो लक्ष्य के मुताबिक विभाग को कभी हितग्राही नहीं मिले। जिसके चलते लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा रहा है। जिसका खामियाजा सबसे अधिक गरीब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

^बायोगैस संयत्र योजना के तहत लक्ष्य पूरा करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। हितग्राहियों की अनदेखी और मवेशियों के खुले में घूमने संख्या कम होने के चलते इसका असर योजना पर पड़ रहा है।” राजेशत्रिवेदी, अधीक्षण यंत्री क्रेडा

} क्रेडा विभाग जिले में बायोगैस संयत्र योजना का संचालन 2002 से कर रहा हैं।

} जिले में सबसे अधिक बायोगैस संयत्र बस्तर बकावंड ब्लाक में लगे हुए हैं।

} एक बायोगैस संयत्र बनाने में 17 हजार रुपए की लागत आती है।

} हितग्राही को इसके लिए 8 हजार रुपए का अनुदान दिया जाता है।

} 12 साल में 400 परिवारों को मिला है लाभ

12 सालों में 400 परिवारों को मिला लाभ

17हजार की लागत में बनने वाले इस संयत्र में हितग्राही को आठ हजार रुपए का अनुदान दिया जा रहा है। बावजूद इसके लाभार्थी हितग्राहियों की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रही है। विभाग के अधीक्षण यंत्री ने बताया कि इस योजना का संचालन पिछले 12 साल से जिले में किया जा रहा है। जिसमें अब तक 400 हितग्राहियों को बायो गैस संयत्र योजना का लाभ दिया जा चुका है। योजना से जुड़ने वालों में बकावंड और बस्तर के लोगों की संख्या अन्य ब्लाकों की तुलना में 30 फीसदी से अधिक है। उन्होंने बताया कि बायोगैस संयत्र बनाने के लिए 2 से 4 घन मीटर का टैंक बनाया जाता है जिसमें अधिकतर 2-3 घन मीटर के ही टैंक बनाए जाते हैं। एक बायोगैस टैंक 10-15 साल तक आसानी से चलता है। इसके लिए हितग्राही को केवल हर दिन गोबर घोल कर टैंक में डालना पड़ता है।