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जनता का दुख-दर्द वीडियो के जरिए सीधे राज्य सरकार के पास

6 वर्ष पहले
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जनता का दुख-दर्द जानने सरकार ने आधुनिक तरीका अपनाया है। लोगों को अपनी शिकायतें राज्य सरकार तक पहुंचाने और उनका हल निकालने भटकना नहीं पड़ेगा। वे अपने जिले में बैठकर ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शिकायत कर सकेंगे। इसका इंतजाम सभी जिलों में कर दिया गया है। ऐसा करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।

सरकार ने तीन जिलों से शुरू की वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग प्रणाली का विस्तार अब राज्य के सभी 27 जिलों में कर दिया है। आवेदकों को राहत पहुंचाने का यह सिलसिला विगत दस वर्षों से लगातार चल रहा है। जनता की आवाज सरकार तक सीधे पहुंच रही है। एक तरह से ‘फास्ट-ट्रेक कोर्ट’ की तर्ज पर लोगों की दिक्कतों को हल किया जा रहा है। शुरुआती दौर में बस्तर (जगदलपुर), सरगुजा और बिलासपुर जिलों को इसमें शामिल किया गया था। इन्हें मिलाकर वर्ष 2008 तक 16 जिलों को इसमें जोड़ा गया।

केस 3

केस 2

केस 1

बालोद जिले के ग्राम देवगहन की प्रणीता पाण्डेय की ट्रैक्टर से दबने से 24 दिसम्बर 2014 को मृत्यु हो गई थी। उनके पालक को नियमानुसार शासन से मुआवजा राशि की पात्रता थी, लेकिन वह राशि उन्हें नहीं मिल पा रही थी। इस पर गुण्डरदेही के एसडीओ को निर्देश दिए गए और उन्होंने प्रणीता के पालक वीरेन्द्र कुमार साहू को 25 हजार रु. की सहायता दी।

जशपुर जिले के ही ग्राम पोंगरो (तहसील कांसाबेल) की तरसिला लोहार ने जशपुर कलेक्टोरेट में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से मंत्रालय के अधिकारियों को बताया कि कुछ लोगों ने उनसे मारपीट कर उन्हें जान से मारने की धमकी दी है, लेकिन आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। मंत्रालय से जशपुर के एडिशनल एसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

निर्देशों का पालन करते हुए जशपुर पुलिस ने आरोपियों को विभिन्न धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर गिरफ्तार कर लिया।

आदिवासी बहुल सरगुजा जिले के अम्बिकापुर निवासी परिवहन विभाग के सेवानिवृत्त वाहन चालक वशिष्ठ नारायण सिंह के वेतन की बकाया राशि और उनके पेंशन प्रकरण का निराकरण लम्बे समय से नहीं हो रहा था। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क कर अपनी समस्या रखी। उनके मामले का निराकरण निर्धारित समय सीमा में कर दिया गया।

इस तरह हो रही सुनवाई

इसप्रणाली में अत्यंत जटिल और संवेदनशील शिकायतों की जिलेवार सुनवाई की जा रही है। हर साल करीब दो हजार प्रकरणों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में हो रही है। आवेदकों को इसके लिए राजधानी रायपुर आने की जरूरत नहीं होती, वे अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय के कॉन्फ्रेसिंग कक्ष में आकर वहां से मंत्रालय के जनशिकायत निवारण विभाग के अधिकारियों से आमने-सामने बात करके अपनी समस्या रख सकते हैं। इस दौरान वहां शिकायतों से संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को भी बुलाया जाता है। कई बार कलेक्टर स्वयं उपस्थित होते हैं। इस प्रणाली में अब तक बड़ी संख्या में आवेदकों की समस्याओं का निराकरण हो चुका है।