दरभा के बच्चे लोकनृत्य की दिखाएंगे झलक
20 छात्र-छात्राएं आदिवासी लोकनृत्य की दिखाएंगे झलक। मिला मौका राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का।
भास्करन्यूज | जगदलपुर
झीरमघाटी में 2 साल पहले हुई एक बड़ी नक्सली वारदात के बाद सुर्खियों में दरभा इलाका आया था। इस क्षेत्र को जिले का काफी संवेदनशील बेल्ट माना जाात है। इसी क्षेत्र के मॉडल स्कूल में पढ़ने वाले 20 छात्र-छात्राओं ने आदिवासी लोक नृत्य प्रतियोगिता में जिला स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया था। जिसके चलते इन बच्चों को राज्य स्तर पर बिलासपुर में होने वाले आयोजन में हिस्सा लेने का मौका मिला है।
खेल एवं युवा क्लायण विभाग द्वारा इन बच्चों के साथ दो संगतकार कुल 22 लोगों को दरभा भेजने की तैयारी की है। विभाग के मुख्यालय से इसके लिए 35 हजार रुपए का बजट चुका है। प्रतियोगियों के दल के आने-जाने भोजन की व्यवस्था खेल महकमें ने की है।
विभाग के स्थानीय कार्यालय प्रभारी अशोक राय के मुताबिक अगले कुछ दिनों में टीम को बिलासपुर भेजा जाएगा। बच्चे वहां आदिवासी लोक नृत्य की प्रस्तुति देंगे। वहां बेहतर प्रदर्शन होने पर नेशनल में मौका मिलेगा। युवा उत्सव के दौरान यहां जिले स्तर की स्पर्धा हुई थी। दूसरी ओर इस साल खेल विभाग की ज्यादातर प्रतियोगिताएं पिछले साल की तुलना में कुछ विलंब से हुई है। अब स्कूलों में परीक्षा का माहौल बन चुका है। ऐसे समय में छात्रों को स्पर्धाओं में भेजना उनके लिए नुकसानदायक होता है। जबकि राज्य, नेशनल में स्थान बनाने पर छात्रों को बोनस अंक मिलते हैं। एक हफ्ते के अंदर सभी स्कूलों से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले ऐसे छात्रों की सूची शिक्षा विभाग को भेजी जाएगी।
13 लाख की मिलेगी खेल सामग्री
ग्रामीणऔर दूर-दराज के इलाकों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए जिले के सातों ब्लाक में 15-15 लाख रुपए की खेल सामग्री देने का फैसला किया था। राजीव गांधी खेल अभियान के तहत यह काम होना था। पूरा सत्र गुजर गया है लेकिन किसी भी ब्लाक में खेलों का सामान नहीं भेजा जा सका है। विभाग के स्थानीय कार्यालय के अनुसार 13 लाख रुपए का आबंटन मुख्यालय से जारी हुआ है। जल्द ही राशि निकाल कर अलग-अलग स्थानों पर सामान भेजा जाएगा। दरअसल यह योजना इस सत्र के शुरुआत में फाइनल हुई थी। जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में खेल का माहौल बने और भविष्य में अच्छे खिलाड़ी तैयार हो सकें। आमतौर पर ग्रामीण इलाकों से पिछले कुछ समय से काफी अच्छे खिलाड़ी निकल रहे हैं। वहीं समस्या यह है कि युवा खिलाड़ियों के लिए इतनी अहम योजनाओं को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। यही वजह है कि अभी तक बस्तर जिले के किसी भी ब्लाक में स्टेडियम बनाने के लिए जमीन तक चिन्हित नहीं हो पाई है।
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