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4 साल में जमीन मिली, मकान का पता नहीं

6 वर्ष पहले
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2011-12 के सत्र में केंद्र सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय ने की थी पहल।

भास्करन्यूज | जगदलपुर

नक्सलीसमस्या से प्रभावित इलाकों में प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापकों को मकानों की बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाने की योजना 4 साल में आगे बढ़ी है।

2011-12 के सत्र में बस्तर, कोंडागांव जिलों में 12 लोकेशन पर 98 भवन तैयार होने थे। जबकि पूरे सात जिलों में 307 भवनों का निर्माण होना था। योजना बनने के बाद चौथा सत्र अंतिम चरण में पहुंच चुका है। जिला में स्थिति यह है कि अभी बकावंड, तोकापाल और लोहांडीगुड़ा ब्लाक में ही प्रशासन जमीन फाइनल कर पाया है। जबकि काम सिर्फ लोहांडीगुड़ा में शुरु हो पाया है। बाकी जगह टेंडर हुए हैं लेकिन इसके बाद क्या हुआ अफसरों को भी पता नहीं है। शिक्षकों के मकानों के लिए सरकार ने 50 फीसदी राशि भी जारी कर दी है।

काम की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नक्सली प्रभाव के इलाकों में काम कर रहे अध्यापकों से जुड़ी इतनी अहम योजना के लिए जमीन तलाशने में 4 साल लग गए हैं। अभी भी जिले के चार ब्लाकों में यह काम होना बाकी है। मकान बन जाने से सभी शिक्षक एक साथ कालोनी में रह सकेंगे। शिक्षा विभाग के सहायक संचालक राजकुमार कठौते के मुताबिक लोहांडीगुड़ा में काम शुरु हो चुका है। बाकी जगह भी काम जल्द शुरु होगा।

हर जिले में कलेक्टर तय करेंगे लोकेशन

शिक्षकोंके लिए दो कमरे, रसोई का सेट 6 लाख रुपए में तैयार किया जाना है। एक ब्लाक में चार सेट मकान होंगे। इसी तरह उन्हें एक कालोनी के रुप में विकसित किया जाएगा। इस योजना का मुख्य मकसद यह भी है कि संवेदनशील इलाकों में कई बार आवागमन ठप रहता है। ऐसी स्थिति में दूर-दराज से अध्यापक अपने स्कूलों तक नहीं पहुंच पाते। जिसका असर पढ़ाई पर पड़ता है। देहात इलाकों में शिक्षकों की कमी पहले से बनी हुई है। इस व्यवस्था का असर यह होता कि जहां अध्यापक पढ़ाएंगे वहीं उनके रहने की व्यवस्था भी हो जाती। सबसे ज्यादा मकान दंतेवाड़ा, सुकमा जिलों में 117, बड़े भवन तैयार होने हैं। सबसे कम दो लोकेशन पर नारायणपुर में 9 जगह भवन बनेंगे। इनके लिए सभी जिलों में कलेक्टरों को लोकेशन तय करना है और भूमि आबंटन की प्रक्रिया पूरी करवानी है। जैसे-जैसे काम पूरे होंगे शेष राशि का भुगतान होगा।

लेटलतीफी