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दो बार नमूना हुआ फेल तो छिन जाएगी समूहों की जिम्मेदारी
{ नए नियम से बढ़ी रेडी टू ईट फूड का निर्माण करने वाले महिला स्वसहायता समूहों की मुसीबत।
{ कैलोरी के साथ ही प्रोटीन की मात्रा कोे बराबर रखने की अनिवार्यता लागू की शासन ने।
भास्करन्यूज | जगदलपुर
मासूमोंके साथ ही किशोरियों को दिए जाने वाले रेडी टू ईट के निर्माण में अब महिला स्वसहायता समूह की लापरवाही किसी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समूहों को अब इस फूड में कैलोरी के साथ ही प्रोटीन की मात्रा बराबर रखना होगा। जांच के लिए भेजे जाने वाले सेंपल दाे बार अमानक पाए जाने की स्थिति में समूह की मान्यता खत्म कर दी जाएगी।
जिला कार्यक्रम अधिकारी एमएन खूंटे ने बताया कि रेडी टू ईट फूड की क्वालिटी मेंटेन करने कुछ समय से लगातार कोशिश की जा रही थी। जिसमें सबसे पहले महिला स्व सहायता समूहों पर नकेल लगाने की कवायद शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि अब तक जांच के लिए भेजे वाले सेंपल के अमानक निकलने पर विभाग शासन से जारी आदेश के तहत समूह से पैसे वसूलकर उनकी मनमानी रोकता था, लेकिन इसका कोई विशेष फायदा नहीं होते देख नया नियम बनाया गया है। इसका पालन करवाने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। ज्ञात हो कि कुछ दिनों पहले रेडी टू ईट फूड के निर्माण से लेकर उसके भंडारण में लापरवाही करने के चलते 8 महिला स्वसहायता समूहों को कलेक्टर अंकित आनंद ने बर्खास्त किया था।
डेढ़ साल से नहीं आई जांच रिपोर्ट
एकआेर शासन रेटी टू ईट फूड की क्वालिटी को मेंटेन करने हरसंभव कोशिश कर रहा है। वहीं दूसरी ओर पूना से जांच रिपोर्ट पिछले एक साल से नहीं आई है। स्थानीय स्तर पर कलेक्टर ने इसकी क्वालिटी मौजूद पोषक तत्वों की जांच के लिए कुछ अधिकारियों की नियुक्ति की थी, लेकिन उनकी यह कोशिश केवल खानापूर्ति तक ही सीमित होकर रह गई। जिसका फायदा महिला स्वसहायता समूहों के द्वारा उठाया जा रहा है। हर महीने समूहों के द्वारा करीब 230 क्विंटल रेडी टू ईट फूड का निर्माण किया जा रहा है।
73 समूह बना रहे हैं रेडी टू ईट फूड
1841आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों, किशोरियों गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले रेडी टू ईट फूड का निर्माण जिले में 73 महिला स्वसहायता समूहों के द्वारा किया जा रहा है। सात ब्लाक की नौ परियोजनाओं में स्थानीय स्तर के समूहों को प्राथमिकता देने के तहत सबसे अधिक महिला स्वसहायता समूह इस समय बस्तर, जगदलपुर बकावंड ब्लाक में रेडी टू ईट फूड का निर्माण कर रही हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि हर महीने रेडी टू ईट फूड के रेंडम के आधार पर 20 फीसदी नमूने जांच के लिए भेजना अनिवार्य किए जाने के चलते पिछले कुछ महीनों से हर माह 15 नमूने सेंपलिंग कर भेजे जा रहे हैं।