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लीज पर नहीं, अब नीलामी पर संचालित होंगी खदानें बस्तर में
}शासन ने चूना पत्थर की खदानों के संचालन को लेकर नियमों में किया बदलाव।
}लीज को हटाकर नीलामी पर संचालन की दी जिम्मेदारी खनिज विभाग को।
भास्करन्यूज | जगदलपुर
जिलेमें खनिज कारोबारियों की मनमानी रोकने और रायल्टी वसूली की मात्रा बढ़ाने के लिए शासन अब खदानों को लीज पर देकर उसकी नीलामी करेगा। जो कारोबारी नीलामी में ज्यादा रेट लगाएगा खदान के संचालन की जिम्मेदारी उसको ही दी जाएगी। शासन की इस नई कवायद को लेकर लीज पर खदान का संचालन करने वाले कारोबारियों की मुसीबतें बढ़ गई तो वहीं कई नए कारोबारियों के आने की संभावना बढ़ गई है। नई कवायद को जल्द से जल्द शुरू करने अधिकारी-कर्मचारी जुटे हुए हैं।
जिला खनिज अधिक अधिकारी आरसी नेताम ने बताया कि नीलामी के बाद खुदाई से पहले खदान का सीमांकन कर खुदाई में निकलने वाले गौण खनिज का आंकलन कर इसके एवज में कारोबारी से रायल्टी की वसूली की जाएगी। खदानों की जांच जूलॉजिस्ट द्वारा करवाई की जाएगी। कारोबारी निर्धारित रकबे में ही खुदाई करे इसके लिए खंभे और बैरीकेट्स भी लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस समय जिले में लीज पर खदानों का संचालन 8 कारोबारियों के द्वारा किया जा रहा है। इनसे 131 रुपए 20 पैसे प्रति क्यूबिक मीटर के आधार पर रायल्टी ली जा रही है। जिसकी नीलामी के बाद बढ़ने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि नीलामी के बाद एक कारोबारी को कम से कम 20 साल के लिए खदान की जिम्मेदारी मिल जाएगी। इस बीच कारोबारी को नवीनीकरण भी नहीं कराना पड़ेगा।
यह होगा फायदा
{क्षेत्रमें बड़े पैमाने पर खनिज पदार्थों की खुदाई होगी
{आधुनिक यंत्रों से खुदाई कर उठाएंगे फायदा कारोबारी
{हर खदान पर विभाग की रहेगी निगरानी
{ खनिज विभाग की आय में भी होगी बढ़ोतरी
{ रसूखदार नहीं कोई भी नीलामी में लेगा भाग
18 खदानें हैं चूना पत्थर की
जिलेके सातों ब्लाकों में इस समय बड़ी खदानों की संख्या 20 है। जिसमें से दो मारबल और 18 चूना पत्थर की हैं। इसमें भी केवल 8 खदानों से पत्थरों की खुदाई हो रही है। अन्य खदानें किसी किसी कारण से बंद हैं जिन्हें नीलामी के बाद शुरू होने की बात कही जा रही है। खनिज विभाग के मुताबिक 76 खदानें लो ग्रेड लाइम स्टोन की हैं जिनसे निकलने वाले पत्थरों का उपयोग घर बनाने में किया जा रहा है। सबसे अधिक खुदाई बस्तर, लोहांडीगुड़ा बकावंड ब्लाक में हो रही है। गौरतलब है कि इस साल विभाग ने रायल्टी वसूली के लिए 11 करोड़ 30 लाख रुपए का लक्ष्य रखा है। जिसे पूरा होने की उम्मीद नहीं लग रही है।