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कुलपति पर दूसरे की अंकसूची से नौकरी करने का लगाया आरोप

5 वर्ष पहले
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बस्तर यूनिवर्सिटी के कुलपति एनडीआर चंद्रा दूसरे की मार्कशीट के जरिए नौकरी कर रहे हैं। इसी मार्कशीट के जरिए पहले उन्होंने नागालैंड यूनविर्सिटी में बतौर प्राध्यापक नौकरी की। इसके बाद वे इसी मार्कशीट के दम पर बस्तर यूनिवर्सिटी के कुलपति भी बने। फर्जी मार्कशीट के खेल को सही ठहराने के लिए उन्होंने अपनी अलग नाम वाली एक वोटर आईडी भी बनवाई है। यह आरोप शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने लगाए हैं। परिषद के विभागीय संयोजक जयराम दास अनिल विश्वकर्मा सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने कुलपति की दो अलग-अलग स्थानों से बनाई गई वोटर आईडी भी मीडिया के सामने पेश की है। इस मामले को लेकर एक शिकायत राज्यपाल को भी कमिश्नर के जरिए भेजी गई है। इसमें कुलपति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग के साथ-साथ तत्काल पद से मुक्त करने की मांग की गई है।

अभाविप कार्यकर्ताओं के अनुसार बस्तर यूनिवर्सिटी के कुलपति एनडीआर चंद्रा का असली नाम रामप्रसाद चंद्रा है। कुछ समय पहले ही उन्होंने अपने नाम के सामने ननकी दाउ जोड़ा है। एबीवीपी का आरोप है कि चंद्रा ने सरकारी नौकरी के लिए अपने भाई ननकी दाउ की मार्कशीट का उपयोग किया है। उन्होंने एक नई वोटर आईडी भी जांजगीर-चांपा जिले के सक्ती अनुिवभाग में मालखरोदा शेष पेज 18 पर





ब्लाक के ग्राम छपोरा से बनवाई है। इस वोटर आईडी में कुलपति के नाम के आगे ननकी दाउ जुड़ गया है वहीं उनके पिता का नाम भी बदल गया है। इसके अलावा उन्होंने अपनी प|ी के नाम की भी नई वोटर आईडी बनवाई हैै जबकि इनमें फोटो एक ही लगे हुए हैं।

दो स्थानों की मतदाता सूची में नाम दर्ज : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जो सूची मीडिया को उपलब्ध करवाई है उसके अनुसार कुलपति एनडीआर चंद्रा का नाम जांजगीर-चांपा के दो अलग-अलग इलाकों की मतदाता सूची में मौजूद है। पहली मतदाता सूची जो जांजगीर चांपा जिले के शक्ति

अनुविभाग के मालखरोदा ब्लाक के बढ़ेरबेली गांव की है, उसमें उनका नाम रामप्रसाद चंद्रा पिता घनश्याम चंद्रा दर्ज है। इसमें उनकी उम्र 54 साल दर्ज है। इसी सूची में ननकी दाउ का नाम भी जिसके पिता का नाम घनसाय चंद्रा और उम्र 53 साल लिखी हुई है। इसके बाद नए नाम से कुलपति ने एक और मतदाता परिचय पत्र जांजगीर चांपा के ही गांव छपोरा से बनवाया है। इसमें इनका नाम ननकीदाउ रामप्रसाद चंद्रा हो गया है और इसमें उनके पिता का नाम भी धनसाय चंद्रा हो गया।

वोटर एक्ट के तहत हो सकती है कार्रवाई

मामले पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि वोटर एक्ट 1955 के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति दो मतदाता परिचय पत्र नहीं रख सकता । यदि ऐसा करते कोई पाया जाता है तो एक साल तक के लिए उसे जेल भेजा जा सकता है।

राज्यपाल को भेजी जाएगी शिकायत

अभाविप कार्यकर्ताओं ने इस मामले की शिकायत राज्यपाल से की है। इसके लिए कार्यकर्ता एक शिकायत पत्र कमिश्नर काे सौंपने पहुंचे थे। कमिश्नर के कार्यालय में उपलब्ध न होने के बाद कार्यकर्ताओं ने यह शिकायती पत्र उपायुक्त एसपी नवर| को सौंपा। उपायुक्त ने बताया कि विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने दूसरे की मार्कशीट से नौकरी करने की शिकायत की है। इस शिकायत को राज्यपाल के यहां भेजा रहा है।

दो-दो वोटर आईडी से संबंधित मामले की तस्दीक के लिए दैनिक भास्कर ने जांजगीर से अपने सीनियर रिपोर्टर पवन शर्मा को सक्ती के बढ़ेरबेली भेजा था। उनके परिजनों ने बताया कि रामप्रसाद दाउ को सभी ननकीदाउ कह कर बुलाते थे। उनके चचेरे भाई ननकी दाऊ सेवानिवृत्त प्रधान पाठक थे, जिनका निधन हो चुका है। ननकी दाउ के बेटे चंद्र कुमार चंद्रा ने बताया कि गांव में सब रामप्रसाद को ननकी दाउ ही बोलते थे, इसकी पुष्टि उनकी भाभी ने भी की है। कुलपति के बड़े भाई हनुमानप्रसाद चंद्रा ने बताया कि उसे ननकी दाउ ही बोलते थे जिसके बाद में सक्ती कोर्ट में हलफनामा देकर अपना नाम बदलकर रामप्रसाद के सामने ननकी दाउ लगा लिया है। बढ़े रवेली में यह भी जानकारी मिली कि वहां से पांच किमी दूर छपोरा गांव में वे अपने मौसी के यहां चले गए थे। वहीं उन्होंने अपना घर भी बना लिया है।

कुलपति को बढ़ेरबेली में ननकीदाउ के नाम से बुलाते थे
शिकायत मिली
संभागायुक्त दिलीप वासनीकर ने बताया कि वे इस समय राजस्व प्रकरणों के निराकण के सिलसिले में कांकेर में हैं। कुलपति के खिलाफ शिकायत आई है इसकी बारीकी से जांच करवाई जाएगी।

मोबाइल बंद
इस मामले में कुलपति का पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन उनके दोनों नंबर 9425590001 अौर 9436604508 लगातार स्वीच ऑफ मिला।

1. शक्ती अनुविभाग के ग्राम पंचायत बढेरवेली पंचायत में रामप्रसाद चंद्रा के नाम से बनी मतदाता सूची जिसमें पिता का नाम धनश्याम चंद्रा है। 2. शक्ती अनुविभाग के ही ग्राम पंचायत छपोरा में ननकी दाऊ रामप्रसाद चंद्रा के नाम से बनी मतदाता सूची जिसमें पिता का नाम भी बदला हुआ है। इसी को आरोप का आधार बनाया गया है।

जगदलपुर | राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने से पहले कमिश्नर कार्यालय के बाहर खड़े अभाविप कार्यकर्ता।

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