स्वच्छ भारत मिशन दाैड़ रहा कागजों पर, 10 महीने में बने आधे शौचालय
जिले में स्वच्छ भारत मिशन को लेकर जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह योजना कारगर नहीं हो पा रही है। कहीं पर इस योजना को लेकर अधिकारियों की अनदेखी सामने आ रही है तो कहीं हितग्राहियों के इसमें रूचि नहीं लेने के चलते योजना के सफल होने की आशंका जताई जा रही है। अनदेखी का आलम यह है कि शौचालय निर्माण के बाद मिलने वाले 12 हजार रुपए की राशि का असर कहीं पर दिखाई नहीं दे रहा है।
जानकारी के मुताबिक इस साल सात ब्लाकों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 19 हजार 558 शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें से अब तक केवल 8 हजार 274 शौचालय ही बन पाए हैं। जब इस मामले को लेकर स्वच्छ भारत मिशन के प्रभारी और सरपंचों से बात कही गई तो उन्होंने खुद के बजाय ग्रामीणों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
बस्तर ब्लाक में सबसे अधिक बनना है शौचालय
स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जाने वाले 19,558 शौचालयों में से सबसे अधिक 6,118 शौचालय का निर्माण बस्तर ब्लाक में होना था। इसके बाद जगदलपुर में 1947, बकावंड 5149, दरभा 2354, लोहांडीगुड़ा 1370, तोकपाल 3032 और बास्तानार में 1575 शौचालय बनाए जाने हैं। इसमें सबसे अधिक 1986 शौचालय बस्तर ब्लाक में ही बनाए जा सके हैं।
शौचालय बनवाने और लक्ष्य के मुताबिक पंचायतों को ओडीएफ करने के लिए कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों की लापरवाही के चलते योजना अब तक परवान नहीं चढ़ सकी है। जल्द ही सभी सरपंचों से चर्चा कर लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश की जाएगी। सुबेंदु दास, जिला समन्वयक , स्वच्छ भारत मिशन
28 में से केवल दो पंचायत ही हुई ओडीएफ
खुले से शौचमुक्त पंचायत बनाने के लिए इस साल जिले की 359 पंचायतों में से 28 पंचायतों को खुले शौचमुक्त करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन अब तक केवल बस्तर ब्लाक के चपका और बालेंगा पंचायत को ही अधिकारी ओडीएफ कर पाए हैं। इसके अलावा योजना के संचालन के नाम पर खानापूर्ति करने के लिए तीन गांव को ओडीएफ बनाया गया है। जिसमें नाकटोका, सेड़वा और जूनावनी शामिल हैं।
जानकारी का है अभाव
तोकापाल के रहने वाले सिरधर कश्यप ने कहा कि शौचालय बनाने के लिए कम से कम 5 हजार रुपए लगेगा। एक साथ इतनी राशि खर्च नहीं कर सकने के कारण वह शौचालय नहीं बनवा रहा है।
बकावंड ब्लाक के डिमरापाल में रहने वाले श्रीराम पटेल ने कहा कि शौचालय बनाने के लिए अब तक कोई जानकारी उन्हें नहीं मिली है। शासकीय योजना को लेकर वे जल्द ही इसके लिए सरपंच से बातचीत करेंगे।
लाेहांडीगुड़ा के रहने वाले विजय पटेल ने कहा कि शौचालय का उपयोग करने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है। गांव में अब तक पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं हो पाई है। जिसके चलते शौचालय नहीं बना रहे हैं।
जगदलपुर। बस्तर ब्लाक में ग्रामीणों द्वारा बनवाया जा रहा शौचालय।